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भालू की पिती की तस्करी में तीन साल की कैद

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पिथौरागढ़। न्यायिक मजिस्ट्रेट डीडीहाट की अदालत ने संरक्षित प्रजाति के भालू (हिमालयन ब्लैक बीयर) की पित्ती की तस्करी के एक मामले में आरोपी को दोषी करार दिया है। उसे तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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पुलिस, एसओजी और वन विभाग की संयुक्त टीम ने 29 फरवरी 2014 को मुनस्यारी के नंदा देवी मंदिर मार्ग से ग्राम धापा निवासी हरीश चंद्र जोशी को संरक्षित प्रजाति के हिमालयी भालू की 100 ग्राम पित्ती के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपी के खिलाफ वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया गया। इस मामले की विवेचना के बाद वन विभाग के एसडीओ मनोहर सिंह सीमिया ने न्यायिक मजिस्ट्रेट डीडीहाट की अदालत में आरोप पत्र दायर किया।

इस मामले में जांच अधिकारी ने मुनस्यारी एसओ, सिपाही दीपक आर्या, वन दारोगा नंदराम, वन रक्षक कैलाश पांडे के बयान दर्ज कराए। विभाग की ओर से मामले की पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता पृथ्वीराज सिंह बनकोटी ने की। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और साक्ष्यों के अवलोकन के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
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तीन साल में तीन मामले पकड़े
जिले में तीन साल के भीतर संरक्षित वन्य जीव अंग की तस्करी के तीन मामले पकड़े जा चुके हैं। वर्ष 2014 में मुनस्यारी से आरोपी हरीश चंद्र जोशी की गिरफ्तारी के बाद वर्ष 2015-16 के बीच दो और मामले पकड़े गए। पुलिस, एसओजी, वन विभाग की संयुक्त टीम ने बागेश्वर के सूपी निवासी कविंद्र सिंह गड़िया को बेड़ीनाग के चौकोड़ी क्षेत्र से भालू की पित्ती के साथ पकड़ा। इसके साथ ही मुनस्यारी के दौसा निवासी राजेश रोशन को डानाधार के पास पकड़ा गया। डानाधार में पकड़े गए मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट डीडीहाट की अदालत आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर चुकी है, जबकि चौकोड़ी में पकड़े गए मामले में पिथौरागढ़ सीजेएम की अदालत आरोपी को दोषी करार देने के साथ ही सजा सुना चुकी है। इस मामले में आरोपी ने जिला जल की अदालत में फैसले के खिलाफ अपील की है।

दवाएं बनाई जाती हैं भालू की पित्त से
भालू की पित्त दवाएं बनाने में काम आती है। यौनवर्द्धक दवाएं बनाने में भी इसका इस्तेमाल किया जाता है। भारत सरकार विशेष परिस्थितियों में दवा निर्माण के लिए भालू की पित्त की खरीद-फरोख्त का लाइसेंस देती है। हिमालयी भालू बंगाल टाइगर की तरह संरक्षित प्रजाति की अनुसूची एक के भाग एक में शामिल है।
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