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सरला बहन को पुण्यतिथि पर याद किया

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पिथौरागढ़। गांधी जी की शिष्या सरला बहन की पुण्यतिथि पर शनिवार को शंखनाद जनचेतना मंच ने कार्यक्रम आयोजित किया और प्रकृति के संरक्षण के लिए सरला के प्रयासों को याद किया।
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मूल रूप से इंग्लैंड की रहने वाली सरला बहन का मूल नाम मिस कैथरीन हाइलामैन था। गांधी जी के प्रभाव में आकर उन्होंने अपना नाम बदल दिया। यहां कच्चाहारी कुटी में आयोजित कार्यक्रम में सरला के जीवन और त्याग के बारे में बच्चों को जानकारी दी गई।

डा. गुरुकुलानंद कच्चाहारी ने कहा कि सरला बहन ने मनुष्य और प्रकृति के संबंधों पर हमेशा चिंता जताई और इस पर कई पुस्तकें भी लिखी। महिलाओं के उत्थान के लिए उन्होंने बड़े काम किए। जीवन के अंतिम समय में वह धरमघर (बेड़ीनाग) आकर रहने लगी। आठ जुलाई 1982 को उनका निधन हुआ। शंखनाद जनचेतना मंच के निदेशक ललित शौर्य ने कहा कि नई पीढ़ी को सरला बहन के जीवन से सीखना चाहिए।
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गोपाल सती बेधड़क ने कहा कि सरला ने अपने नाम के अनुरूप पूरा जीवन सरलता के साथ बिताया। इस दौरान आयुष जोशी, संदीप मेहरा, सतीश शर्मा, मंजू कापड़ी, भुवन जोशी, कविता, पूनम आदि मौजूद थे।
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