पिथौरागढ़। 5040 मेगावाट के महाबांध को लेकर डूब क्षेत्र में आने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता विस्थापन को लेकर सामने आई है। सदियों से बेनाप भूमि पर बसे भूमिहीनों और वर्ग 4-5 की जमीन पर बसे लोगों को भविष्य की चिंता सता रही है। सर्वे रिपोर्ट पर गंभीर सवाल उठना पंचेश्वर बांध प्राधिकरण के लिए सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
जनसुनवाई के दौरान विस्थापन को लेकर उठे सवालों से लोगों की चिंता स्पष्ट रूप से सामने आई। जनसुनवाई में पहुंचे हर किसी व्यक्ति ने विस्थापन का सवाल प्रमुखता से उठाया। लोगों के मन में आशंका थी कि विस्थापन के नाम पर कहीं ऐसे स्थान पर न बसा दिया जाए, जहां कोई सुविधा ही न हो। लोगों ने एक स्वर से कहा कि सभी प्रभावितों को सुविधाजनक स्थान पर बसाया जाए और एक समान सुविधा मिले। लोगों की यह आशंका इसलिए भी बलवती हुई कि पिथौरागढ़ जिले में बांध से 87 गांव प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन पूर्ण रूप से प्रभावित गांव केवल 16 बताए जा रहे हैं। इसे लेकर लोग आशंकित हैं कि कहीं 16 ही गांवों के लोगों को सुविधा मिले और अन्य लोग सुविधा से वंचित हो जाएंगे।
दूसरा बड़ा डर भूमिहीन और वर्ग 4, 5 की जमीन में सदियों से रह रहे लोगों की उभर कर सामने आई। इन लोगों ने सुनवाई कर रहे अधिकारियों से बार-बार कहा कि भूमिहीनों के लिए प्राधिकरण की क्या योजना है, लेकिन इसका स्पष्ट उत्तर उनको नहीं मिल पाया। बांध बनने की दिशा में भूमिहीनों का क्या होगा, यह सबसे बड़ा सवाल है। डीपीआर को लेकर भी गंभीर सवाल लोगों ने किए। हर किसी ने दावा किया कि बांध का सर्वे गांवों में किया ही नहीं गया है, फिर कैसे बांध की डीपीआर तैयार हो गई। पंचेश्वर बांध डूब क्षेत्र प्रभावित संघर्ष समिति झूलाघाट के अध्यक्ष चंद्रशेखर भट्ट का आरोप था कि एक एनजीओ की फर्जी रिपोर्ट के आधार पर डीपीआर तैयार की गई है। कोई भी गांवों में सर्वे के लिए नहीं आया।
होता रहेगा सड़कों, पुलों का निर्माण
पिथौरागढ़। पंचेश्वर बांध का निर्माण शुरू होने के बाद भले ही टनकपुर-जौलजीबी सड़क का अधिकांश हिस्सा, कई निर्माणाधीन सड़कें और पुल बांध से प्रभावित होंगे, लेकिन जनसुनवाई में बताया गया कि निर्माणाधीन पुलों और सड़कों का काम होता रहेगा। उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी सोमपाल सिंह ने प्रभावितों को बताया कि बांध निर्माण में 10 साल का समय लग सकता है। इस दौरान सड़कों, पुलों का निर्माण रोकना गलत होगा। इस तरह से बांध बनने के दौरान सरकारी धन का पलीता सड़कों और पुलों के नाम पर भी लगेगा।
पर्यावरणीय चिंता नहीं आई सामने
पिथौरागढ़। पर्यावरणीय स्वीकृति की जनसुनवाई थी, लेकिन पर्यावरणीय चिंता को लेकर हरेला संस्था के मनोज मठवाल से अलावा किसी ने भी बांध से पर्यावरण को होने वाले नुकसान का मुद्दा नहीं उठाया।