श्रीनगर। पीपलचौंरी में पिछले 267 दिनों से एलयूसीसी धोखाधड़ी मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनका धन वापस दिलाए जाने की मांग के लिए धरना प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान गत अप्रैल माह में कीर्तिनगर पुल के पास जाम लगाने के मामले में धरनास्थल पर नोटिस लेकर पहुंची पुलिस को महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ा।
आंदोलन का नेतृत्व कर रही सरस्वती देवी ने कहा कि अप्रैल माह में कीर्तिनगर पुल के पास सांकेतिक रूप से सड़क किनारे बैठ कर महिलाओं ने धरना प्रदर्शन किया था, बाकायदा प्रशासन से इसकी अनुमति ली गई थी, लेकिन अब उन्हें डराने के लिए सात माह पहले के मामले में नोटिस थमाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं सरकार के इस उत्पीड़नात्मक कार्रवाई का घोर विरोध करती हैं।
उन्होंने पुलिस से नोटिस लेने से इंकार करते हुए कहा कि सरकार इतनी तत्परता धोखाधड़ी करने वाली एलयूसीसी कंपनी के खिलाफ करती तो अभी तक लोगों का डूबा हुआ अरबों रुपया वापस आ जाता। पीपलचौरी में 267 दिन से उनका धरना चल रहा है लेकिन सरकार के किसी भी मंत्री एवं जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए घातक बताया।
मौके पर महिलाओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने नोटिस के मामले में महिलाओं को समझाने की कोशिश की लेकिन उन्होंने इस मामले में विरोध जताया। इस अवसर पर प्रीति रावत, सीमा रावत, आरती, सुमन, गंगा, किरण कैंतुरा, किरण पुंडीर, लक्ष्मी भट्ट, जशोदा पटवाल, सुमित्रा, बसंती नेगी, दीप्ति, पूनम रावत सहित बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रही।