मवेशियों के मुआवजे को लेकर बढ़ रहे फर्जी केसों को देखते हुए अब वन विभाग मृत मवेशी के साथ वन कर्मचारी की फोटो होने पर मुआवजा देगा। विभाग ने ऐसे कई केसों को खारिज कर दिया है, जिन्होंने मुआवजे के आवेदनपत्र के साथ मृत मवेशी और वन कर्मी की फोटो नहीं लगाई।
प्राय: देखने में आता है कि लोग मृत मवेशियों के फर्जी केस बना लेते हैं। इसे देखते हुए अब विभाग आवेदनकर्ता को मृत मवेशी के साथ वनकर्मी की फोटो होने पर ही मुआवजा राशि देगा। ऐसे ही एक मामले में डांगी गांव की महिला रेखा देवी ने वन मंत्री को पत्र भेजकर मुआवजे की मांग की है। महिला ने बताया कि उनकी दो दुधारु गायों को गुलदार ने मार दिया था। वनकर्मी को सूचित करने के बावजूद वह मौके पर नहीं पहुंचे। वन कर्मचारी ने उसे यह कहकर टाल दिया कि मेडिकल प्रमाणपत्र से ही मुआवजा मिल जाएगा, लेकिन सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद उनका आवेदन निरस्त किया गया है।
नागदेव रेंज के वन क्षेत्राधिकारी आशीष डिमरी ने बताया कि गुलदार द्वारा मवेशियों को मारने को लेकर मुआवजे लेने के लिए लोग गलत ढंग से केस फाइल कर रहे हैं। इनमें एक खच्चर का केस आया है कि खच्चर की मौत घर पर हुई, लेकिन मालिक ने मृत खच्चर को गदेरे में फेंक दिया और मुआवजे के लिए आवेदन कर दिया।
जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई तो उसने बताया कि किसी के कहने पर उसने यह आवेदन किया। डिमरी ने बताया कि यदि किसी के मवेशी को गुलदार मारता है तो उसे 24 से 48 घंटे में सूचित करना जरूरी है, लेकिन लोग डॉक्टर की रिपोर्ट बनवाकर मुआवजा लेने की फिराक में रहते हैं।
गुलदार द्वारा मवेशी को मारने पर यह मिलती है राशि :
गाय 15000
घोड़ा/खच्चर 40000
बैल/भैंस 15000
बकरी/भेड़ 3000