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जीआईएस का प्रयोग आज के समय की जरुरत

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गढ़वाल विवि के भूगोल विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला के समापन अवसर पर बोलती वक्ता - फोटो : SHRINAGAR
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गढ़वाल विवि के भूगोल विभाग की ओर से ओपन सोर्स जीआईएस सॉफ्टवेयर सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने जीआईएस (भौगोलिक सूचना तंत्र) पर व्याख्यान दिए। बताया कि जीआईएस का प्रयोग आज के समय की जरूरत है।
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ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. निष्ठा जयसवाल ने कहा कि नई तकनीकी का उपयोग समय की मांग है। शिक्षा क्षेत्र में नई-नई तकनीकियों को जोड़कर जहां कार्य सरल हो जाता है, वहीं गुणवत्ता भी बढ़ती है। अति विशिष्ट अतिथि आईएएसई डीम्ड विश्वविद्यालय सरदार शहर राजस्थान के उपकुलपति प्रो. देवेंद्र मोहन ने कहा सात दिवसीय कार्यक्रम में जिओ मॉडलिंग, जियो रेफ्रंसिंग और इमेज प्रोसेसिंग के प्रशिक्षण से निश्चित रूप से शिक्षकों एवं छात्रों को लाभ मिलेगा। विशिष्ट अतिथि हिमाचल विश्वविद्यालय में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. डीडी शर्मा ने जीआईएस को आज की आवश्यकता बताया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में इसके बगैर हम आगे नहीं बढ़ सकते। प्रो. विनोद नौटियाल ने कहा कि जीआईएस का उपयोग भूगोल ही नही, बल्कि पुरातत्व के क्षेत्र में भी प्रमुखता से किया जा रहा है । पुराने लैंडस्केप व बसावट का अध्ययन इससे काफी आसान हो जाता है। कार्यक्रम में डा. राजेश भट्ट , कार्यक्रम संयोजक भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो. एमएस नेगी , विवि के डीएसडब्लू प्रो. पीएस राणा, प्रो.डीपी सकलानी, डा. अतुल कुमार, प्रो. आरएस पंवार, राजेश कुमार अभय, मनोज कुमार पटारिया, डा. मोनिका कनान, डा. दलजीत सिंह, प्रो. आईवी मुरलीकृष्ण, प्रो. एसके बंदूनी, प्रो. वाई सिद्धकी और डा. वीडब्लू पांडे आदि ने व्याख्यान दिया।
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