पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम के साथ प्रदेश सरकार ने टोकन टैक्स में बढ़ोतरी कर नई दरें जारी कर दी हैं। नई दरों के हिसाब से ट्रांसपोर्टरों को पहले से दोगुना टैक्स चुकाना पड़ रहा है। पहले जिस वाहन का छह महीने का टोकन टैक्स 1800 रुपये था, अब बढ़कर 3600 रुपये हो गया है। इससे ट्रांसपोर्टरों में रोष है।
प्रदेश में अनुच्छेद 370 हटने और कोविड-19 के कारण लॉकडाउन का ट्रांसपोर्ट जगत पर काफी असर पड़ा है। सरकार की नई नीतियां ट्रांसपोर्टरों के व्यापार पर भारी पड़ रही हैं। प्रदेश परिवहन विभाग ने दो जून 2020 को तीन अगस्त 2019 से पहले पंजीकृत वाहनों के लिए नए टोकन टैक्स की दरें तय की थीं। हालांकि विभाग का कहना था कि यह ट्रांसपोर्टरों के लिए राहत की बात है कि सरकार ने नौ प्रतिशत टैक्स न लगाकर दरों में थोड़ी बढ़ोतरी की है।
नई दरों के साथ टोकन टैक्स भरने वाले ट्रांसपोर्टरों का कहना है सरकार ने दोगुना टैक्स बढ़ाया है। वाहन मालिकों ने कहा कि एक हजार से 3600 किलोग्राम तक पंजीकृत वाहन का पहले छह महीने का टोकन टैक्स 1800 रुपये होता था, नई दरों के बाद अब 3600 रुपये देेना पड़ रहा है।
नया टैक्स ट्रांसपोर्टरों के लिए चुनौती : वजीर
जेएंडके ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन के चेयरमैन टीएस वजीर ने कहा कि तीन अगस्त, 2019 से पहले पंजीकृत वाहनों के लिए जारी टोकन टैक्स की दरें ट्रांसपोर्टरों पर सरकार ने बोझ डाला है। कोविड-19 के कारण ट्रांसपोर्ट पहले की मंदी का शिकार है। ऐसे में प्रदेश सरकार के नया टैक्स ट्रांसपोर्टरों के लिए चुनौती है।