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देवस्थानम बोर्ड के विरोध में चंद्रबदनी मंदिर के पुरोहित भी मुखर

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सिद्धपीठ चंद्रबदनी को देवस्थानम बोर्ड में शामिल किए जाने पर मंदिर समिति के पदाधिकारी इसके विरोध में मुखर हो गए हैं। समिति ने सरकार के निर्णय को पुरोहितों के अधिकारों का हनन और धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया है।
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मंदिर समिति के प्रबंधक और चारधाम तीर्थपुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत संरक्षक डीपी भट्ट, मुख्य पुजारी दाताराम भट्ट व सचिव इंद्रभूषण ने चंद्रबदनी मंदिर को देवस्थानम बोर्ड में शामिल किए जाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1986 से पूर्व चंद्रबदनी मंदिर टिहरी नरेश द्वारा गठित टेंपल बोर्ड के अधीन था। इसमें 64 मंदिर शामिल थे। चंद्रबदनी मंदिर में पूजा अर्चना के अधिकार के लिए पुजारगांव के लोगों को न्यायालय की शरण में जाना पड़ा। वर्ष 1984 में न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला सुनाया, जिसके बाद पंडित दाताराम भट्ट की अध्यक्षता में चंद्रबदनी कारोबारी प्रबंध समिति का गठन किया गया है। जो कि लगातार मंदिर की व्यवस्थाओं को देख रही है, लेकिन अब सरकार मंदिर को देवस्थानम बोर्ड के अधीन कर सभी परंपराओं और व्यवस्थाओं को खराब करने पर उतर आई है। मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि मंदिर में मुख्य पुजारी के साथ ही 30 अन्य पुजारी हैं। सेमल्टी परिवार मंदिर के पुरोहित का कार्य देखते हैं। जबकि 20 लोक वादक परिवार मंदिर में नौबत व मंडाण आदि की परंपरा निभा रहे हैं। इस मौके पर मौजूद मंदिर समिति के उपाध्यक्ष शक्ति प्रसाद भट्ट, उप प्रबंधक जगदंबा प्रसाद, उपसचिव केशवानंद सेमल्टी व कोषाध्यक्ष शिवि प्रसाद तथा भंडारपाल माहदेव भट्ट ने सरकार से देवस्थानम को भंग किए जाने की मांग की है।
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