श्रीनगर। नगर में अलकेश्वर और एनआईटी के पास अलकनंदा नदी किनारे नमामि गंगे परियोजना के तहत बने शमशान और स्नान घाट ग्यारह वर्षों से क्षतिग्रस्त है। वर्ष 2013 की आपदा से एनआईटी के पास बने घाट पर रेत जमा है। यहां पीने के पानी के लिए बनी टंकी, कुर्सियां, शौचालय आदि क्षतिग्रस्त हैं। साथ ही यहां लगी अधिकतर सोलर लाइटें भी चोरी गई हैं।स्थानीय निवासी मातवर सिंह बताते हैं कि क्षेत्र के करीब 500 से अधिक गांवों के लोग इस घाट पर दाह संस्कार के लिए आते हैं। लेकिन यहां, अंतिम संस्कार के लिए लकड़ी तक की सुविधा नहीं है। उन्होंने नगर निगम से एनआईटी के पास बने इस घाट पर लकड़ी का टाल खोलने की मांग की है। वहीं नगर के पास अलकेश्वर स्नान घाट और शवदाह स्थल का बुरा हाल हैं।
यहां स्नान घाट पर सुरक्षा के लिए बनाए गए आरसीसी के ब्लॉक, लोहे की चेन, कुर्सियां रेलिंग आदि भी क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। साथ ही शवदाह के लिए बनाए गए दो टीनशेड में से एक शेड पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने से लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। यहां की व्यवस्थाएं इतनी खस्ताहाल हैं कि कई बार यहां पर दाह संस्कार के लिए एक से अधिक शव आने से लोगों को खुले में ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है।
20 साल बाद पहुंचा अपने गांव खूब हाइ वोल्टेज ड्रामा
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