तीर्थ पुरोहित समाज ने प्राचीन काल से चली आ रही बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की परंपरा को कायम रखने की मांग की है। कहा कि रावल के न पहुंचने पर टिहरी राज परिवार या डिमर गांव निवासी पुजारियों द्वारा भी बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने की बात की जा रही है, जिसका कि तीर्थ पुरोहित समाज घोर विरोध करेगा।
बदरीनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित गौरभ पंचभैया, रजनीश मोतीवाला, विपुल सवासेरी, अशोक टोडरिया ने केंद्र व राज्य सरकार से धाम के कपाट विधि विधान और प्राचीन परंपरानुसार खोले जाने की मांग की है। तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि उत्तराखंड स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने को लेकर बहस छिड़ी हुई है, जिसमें दक्षिण भारत से रावल ईश्वरीप्रसाद नंबूदरी के बदरीनाथ धाम के कपाट खोलने के लिए न पहुंचने पर टिहरी के राजपरिवार या डिमर गांव निवासी पुजारियों द्वारा भी कपाट खोले जाने की बात सामने आ रही है, जिसका देवप्रयाग में बदरीनाथ धाम तीर्थ पुरोहित समाज कड़ा विरोध करेगा। तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा सिर्फ दक्षिण भारतीय नंबूदरी ब्राह्मण को ही भगवान बदरीनाथ की पूजा अर्चना करने का अधिकार मिला है। इस परंपरा को किसी भी स्थिति में तोड़ा जाना उचित नहीं है। कहा कि देवप्रयाग के तीर्थ पुरोहित भी मूल रूप से दक्षिण भारतीय नंबूदरी ब्राह्मण है, जिन्हें बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं से पूजा अर्चना करवाने का अधिकार मिला है, लेकिन उन्हें कपाट खोलने और बंद करने का कोई अधिकार नहीं दिया गया है। वहीं टिहरी राजपरिवार को धाम में धर्मार्थ कार्यों की व्यवस्था जुटाने व कपाट खोलने की तिथि निर्धारित करने का अधिकार है। इसलिए किसी को भी अपने अधिकारों से हटकर नई परंपरा शुरू नही करनी चाहिए ।