पौड़ी। करीब दस साल पहले भूमि खरीदने के नाम पर ली गई धनराशि नहीं लौटाने के मामले में सत्र न्यायाधीश पौड़ी धर्म सिंह की अदालत ने दोषी की अपील खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है। मामला 2015 में श्रीनगर तहसील क्षेत्र का है।अधिवक्ता महेश बलूनी ने बताया कि रामधवन निवासी हाइडिल कॉलोनी श्रीनगर को दोषी राजेश कुकशाल ने तहसील क्षेत्र के कंसमर्दनीसैंण इलाके में भूमि दिलाने के नाम पर 7.50 लाख रुपये की धनराशि ली थी। दोषी राजेश कुकशाल भी श्रीनगर में ही प्रॉपर्टी डीलिंग का कार्य करता था। उसने जल्द ही उन्हें भूमि उपलब्ध कराए जाने का आश्वासन देकर अग्रिम राशि देने को कहा। जिस पर रामधवन ने अपने रिश्तेदारों से कर्जा लेकर यह राशि प्रॉपर्टी डीलर को दे दी। समय बीतता गया लेकिन दोषी उन्हें भूमि उपलब्ध कराने के नाम पर टालमटोली व बहाने बाजी करता रहा। बाद में प्रॉपर्टी डीलर ने पीड़ित को भूमि या पूरी राशि वापस देने का भरोसा दिया। जबकि पीड़ित उससे भूमि अथवा धनराशि वापस दिलाने की मांग करने लगा तो प्रॉपर्टी डीलर ने उसे 9 जुलाई 2015 को 7.50 लाख रुपये का बैंक का एक चेक सौंपा। जब वह चेक जमा करवाने बैंक पहुंचा तो प्रॉपर्टी डीलर के खाते में धनराशि अपर्याप्त मिली और चेक बाउंस हो गया। इस पर रामधवन ने 5 अगस्त 2015 को प्रॉपर्टी डीलर राजेश कुकशाल को कोर्ट नोटिस भेजकर 15 दिनों का समय दिया। धनराशि नहीं मिलने पर उन्होंने 15 सितंबर 2015 को न्यायालय में मुकदमा दर्ज करवाया। जिस पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी श्रीनगर ने जनवरी 2020 में
प्रॉपर्टी डीलर राजेश कुकशाल को दोषी पाते हुए दो साल का साधारण कारावास और 10,37,000 रुपये का अर्थदंड लगाया। कोर्ट के इस आदेश को दोषी ने जनवरी 2020 में जिला न्यायालय में चुनौती दी थी। अब सत्र न्यायाधीश पौड़ी की अदालत ने न्यायिक मजिस्ट्रेट श्रीनगर के आदेश के बरकरार रखते हुए दोषी की अपील को निरस्त कर दिया है।