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Pauri News: गढ़भोज में चखा मंडुवे की पूरी और चैंशू का स्वाद

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श्रीनगर। उत्तराखंड के परंपरागत भोजन का उत्सव गढ़भोज दिवस 2025 का आयोजन राइंका श्रीनगर स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस छात्रावास परिसर में हर्षोल्लास के साथ किया गया। इस मौके पर आयोजकों ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य उत्तराखंड के परंपरागत फसलों से बनने वाले भोजन को मुख्यधारा से जोड़कर आर्थिकी का माध्यम बनाने एवं नई पीढ़ी को इसके औषधीय गुणों से परिचित करवाना है।
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कार्यक्रम का उद्घाटन कैबिनेट मंत्री डॉ. धन सिंह रावत व गढ़वाल केंद्रीय विवि के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने किया। गढ़ भोज शृंखला के तहत चैशू, मंडुवे की पूड़ी, साठी का भात, छेमी की दाल बनाई गई। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को परंपरागत ज्ञान से रूबरू करवाने में गढ़ भोज दिवस का महत्वपूर्ण योगदान है। कुलपति प्रो.श्रीप्रकाश सिंह ने कहा कि यह सुंदर प्रयास है। आने वाले समय में गढ़ भोज पर शोध कार्य किए जाएंगे। गढ़भोज दिवस के प्रणेता द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि हमारे भोजन में जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने की ताकत है, हमारी भोजन संस्कृति व आपदाओं से लड़ने में सक्षम थी, जबरदस्त रोग प्रतिरोधक क्षमता वाली है। इस परंपरा को बनाकर नई पीढ़ी को ज्ञान हस्तांतरित करना गढ़भोज दिवस का मुख्य उदेश्य है। इस अवसर पर डाॅ. अरविंद दरमोड़ा, प्रो. यतीश वशिष्ठ, प्रो. मोहन पंवार, प्रो. किरण बाला, प्रो. किरन डंगवाल, एसएस मेहरा, मुकेश बहुगुणा, वंदना पंवार, प्रो. प्यार सिंह राणा, प्रो नरेंद्र चौहान, समीर रतूड़ी आदि मौजूद रहे।



इन्हें गढ़भोज सम्मान से नवाजा

कार्यक्रम में प्रसिद्ध रंगकर्मी विमल बहुगुणा, गंगा आरती समिति के अध्यक्ष प्रेम बल्लभ नैथानी, पत्रकार गंगा असनोड़ा, सतेंद्र भंडारी, खिर्सू के खंड शिक्षा अधिकारी अश्विन रावत को गढ़भोज सम्मान 2025 से नवाजा गया।
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