श्रीनगर और आसपास के क्षेत्रों में निजी स्कूलों की 60 से ऊपर बसें संचालित होती हैं। इसके अलावा लगभग 20 छोटे-बड़े वाहनों में भी स्कूली बच्चों को ढोया जाता है, लेकिन स्कूली वाहनों के लिए निर्धारित मानकों का यहां भी पालन नहीं हो रहा है। कई बसों और छोटे वाहनों में ओवरलोडिंग की दिक्कत है। इसके अलावा कतिपय वाहन चालक वाहनों को गलत तरीके से चलाते हैं। कई बार परिचालक बच्चों को उतारकर सड़क पार नहीं करवाते हैं, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
कई ऐसे वाहन हैं, जो स्कूल बस के लिए पंजीकृत नहीं हैं। इन वाहनों का रंग न तो पीला है और न ही खिड़कियों में जाली लगी है। लगभग एक साल पहले पुलिस और परिवहन विभाग ने मानकों का पालन न करने वाले स्कूली वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया था, लेकिन अब यह अभियान कहीं नहीं दिखाई दे रहा है। यहां बता दें कि करीब एक साल पूर्व चौरास क्षेत्र में एक स्कूली बस के ब्रेक फेल हो गये थे। बस के ब्रेक फेल होने पर चालक ने बस को पहाड़ी से टकरा दिया, जिससे सभी बच्चे सुरक्षित रहे। ब्यूरो