मकान के पीछे भूस्खलन की जद में आया भवन। स्रोत जागरूक पाठक
थलीसैंण। जनपद में पिछले चार दिनों से जारी बारिश के चलते विकासखंड के दूरस्थ किमवाड़ी गांव में श्रीमती देवी का घर भूस्खलन की जद में आ गया है। परिजनों के अनुसार, घर के पीछे मलबा जमा होने से कच्चे पठालदार मकान में दरारें पड़ गई हैं, जिससे परिवार को दूसरे ग्रामीणों के घर में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन पर उनकी समस्या की अनदेखी का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि करीब तीन वर्ष पहले घर के पीछे पंचायत भवन बनने के बाद से हर बारिश में मलबा मकान तक पहुंच रहा है। उनका आरोप है कि तीन साल पहले आई आपदा में उनकी गौशाला और तीन मवेशी भी भूस्खलन की चपेट में आ गए थे, लेकिन अब तक मुआवजा नहीं मिला। वहीं, पिछले वर्ष परिवार के मुखिया रणजीत सिंह बिष्ट के निधन के बाद परिवार आजीविका संकट से भी जूझ रहा है।
क्या कहते हैं पीड़ित
- बीते चार दिनों से हो रही बारिश से मलवा घर के पीछे जमा हो गया है। बीते साल पति की मौत के बाद किसी तरह से परिवार का भरण पोषण कर रही हूं। ऐसे में घर ढह गया तो आशियाना भी छिन जाएगा। - श्रीमति देवी किमवाड़ी।
- पठालदार दो मंजिला (ओबरा- पांडा) वाला मकान है। मकान पर दरारें पड़ गईं हैं। ऊपर के कमरे में जाने पर चर-चर की आवाजें आ रहीं हैं। बीते दो-तीन दिनों से दूसरे ग्रामीणों के घरों में शरण लेने को मजबूर हैं। तहसील व जिला प्रशासन से कई बार मदद की गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। भाई सोबन सिंह पिछले महीने नौकरी की तलाश में दिल्ली गया है। घर में मां- बेटी ही अकेली हैं। - संतोषी बिष्ट, किमवाड़ी।
क्या कहते हैं अधिकारी
- राजस्व उप निरीक्षक को गांव जाकर निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। प्रशासन से जो भी संभव मदद होगी उसे जल्द पूरा किया जाएगा। - कृष्णा त्रिपाठी, एसडीएम थलीसैंण।