ऑनलाइन कार्यशाला को संबोधित करती गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल।
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जलवायु परिवर्तन पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में गढ़वाल विवि कुलपति ने समाज में सुधार के लिए शोध कार्यों पर बल दिया। जबकि आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के डा. आशुतोष गुप्ता ने एरोसोल वायु गुणवत्ता और जलवायु परिवर्तन को हिमालयी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बताया।
मंगलवार को गढ़वाल केंद्रीय विवि एवं आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ आब्जर्वेशनल साइंसेस एरीज नैनीताल की ओर से ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने कहा कि कोविड-19 के कारण हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका पर बुरा प्रभाव पड़ा है। इस पर ध्यान देने की अधिक जरूरत है। यूलेंस एजुकेशन फाउंडेशन नेपाल के डा. अर्निको पांडे ने एरोसोल और वायु की गुणवत्ता के साथ-साथ हिमालय के संरक्षण पर सुझाव रखे। इस मौके पर यूएसए के डा. पिफलिप होपके, कोलंबिया के प्रो. वी पफेय मैकनील, एथेंस ग्रीस के राष्ट्रीय वेधशाला के डा. दिमित्रिस कासकौटिस ने हिमालय पर वायुमंडलीय एरोसोल के प्रकार, स्रोत की जानकारी दी। कार्यशाला में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के प्रो. एसएन त्रिपाठी, डा. उमेश चंद्रा दुम्का, डॉ. आलोक सागर गौतम, प्रो.आरसी रमोला, प्रो. एचसी नैनवाल, प्रो. आरएस नेगी, प्रो. पिलिप के होप, डा. रितेश गौतम, जर्मनी की एलिना, ग्रीस के प्रो. निकोलस, जापान के डा. प्रदीप खत्री आदि ने कार्यशाला में प्रतिभाग किया। संवाद