श्रीनगर जल विद्युत परियोजना का संचालन कर रही एएचपीसीएल (अलकनंदा हाइड्रोपावर कंपनी लिमिटेड)/ जीवीके ने कर्मचारियों के लिए वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) लागू कर दिया है। कंपनी ने इस संबंध में कोटेश्वर स्थित ऑफिस मेें नोटिस भी चस्पा दिया है। वहीं परियोजना प्रभावितों ने इसे वीआरएस की आड़ में जबरन नौकरी छीनने का कदम बताया है। हालांकि कंपनी ने इसे स्वैच्छिक बताते हुए खंडन किया है।
एएचपीसीएल में मौजूदा समय में लगभग 280 ऐसे कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिनकी भूमि जल विद्युत परियोजना के लिए अधिग्रहीत की गई। एएचपीसीएल ने वर्तमान वित्तीय स्थिति को देखते हुए वीआरएस लागू किया है। कंपनी के कोटेश्वर कार्यालय में नोटिस जारी करते हुए कहा गया कि वीआरएस-2020 के अंतर्गत इच्छुक कर्मचारी आवेदन कर सकते हैं। नोटिस के साथ ही वीआरएस आवेदन पत्र भी चस्पा किया गया है। दूसरी ओर क्षेत्र पंचायत सदस्य चौरास प्रताप भंडारी ने बताया परियोजना निर्माण के दौरान कंपनी ने भूमिधरों के बच्चों को गढ़वाल विवि की तर्ज पर 30 सालों का रोजगार दिया था, लेकिन कंपनी वीआरएस की आड़ में उनको नौकरी से हटा रही है। इधर, कंपनी के एचआर मैनेजर एके सिंह ने बताया कि वीआरएस पूर्ण रुप से स्वैच्छिक है। किसी को हटाया नहीं जा रहा है।