पौड़ी। जिले मेें त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण सूची में बड़े स्तर पर गड़बड़ी व चौंकाने वाले मामले उजागर हुए हैं। जिले के दो ग्राम पंचायतों में समस्त परिवार अनुसूचित जाति के होने के बावजूद प्रधान पद अनारक्षित व महिला के लिए है। प्रमुख के पदों पर चक्रानुक्रम की अवहेलना देखने को मिल रही है। जिला पंचायत की सीटों के आरक्षण को लेकर भी आपत्तियां सामने आई हैं।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण की अनंतिम सूची में ग्रामीणों ने 75 से अधिक आपत्तियां दर्ज कराई हैं। इनमें सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला ग्राम प्रधान पद पर सामने आया है। विकास खंड पाबौ का सिमखेत और पोखड़ा ब्लाक का ओडगांव पूर्ण रूप से अनुसूचित जाति परिवारों का गांव है, लेकिन यहां प्रधान का पद अनारक्षित व महिला सामान्य किया गया है। सिमखेत गांव निवासी व पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद टम्टा ने बताया कि उनके गांव में समस्त परिवार अनुसूचित जाति के हैं, लेकिन प्रधान पद अनारक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि आरक्षण की सूची देखकर लग रहा है कि अधिकारियों ने बिना होमवर्क के ही यह सूची तैयार की है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य पुष्कर जोशी ने बताया कि पोखड़ा ब्लाक के ओडगांव में अनुसूचित जाति के परिवार रहते हैं, लेकिन प्रधान पद सामान्य महिला के लिए आरक्षित किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत मुसमोली में प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया है, जबकि गांव में मात्र दो परिसर ही अनुसूचित जाति के हैं। इनमें से एक के पांच बच्चे हैं, जबकि दूसरा चुनाव ही नहीं लड़ना चाहता है। पूर्व जिला पंचायत सदस्य त्रिभुवन उनियाल ने कहा कि क्षेत्र पंचायत सीट टिमरी व अडेथ अनुसूचित जाति बाहुल्य हैं, लेकिन पंचायतराज विभाग ने टिमरी को सामान्य महिला व अड़ेथ को अनारक्षित किया है। अधिवक्ता व पूर्व जिला पंचायत सदस्य दीपक भंडारी ने कहा कि बीरोंखाल, खिर्सू, कल्जीखाल व जयहरीखाल ब्लाक में प्रमुख पदों पर आरक्षण के चक्रानुक्रम का खुला उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि जिला पंचायत सदस्य सीट कुल्हाड़ व चांदपुर में भी अनियमितता की गई है। उन्होंने कहा कि आरक्षण पर दर्ज की गई आपत्तियों का निस्तारण नहीं किया गया तो जनहित याचिका दायर की जाएगी। वहीं सीडीओ पौड़ी हिमांशु खुराना ने बताया कि दर्ज आपत्तियों का निस्तारण 29 व 30 अगस्त को किया जाएगा।