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प्रधान स्वयं ही बन गए मनरेगा में मजदूर

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विकासखंड खिर्सू की एक ग्राम पंचायत में प्रधान स्वयं ही मनरेगा मजदूर बन गए और मजदूरी का भुगतान भी प्राप्त किया। साथ ही प्रधान ने स्वयं के साथ परिवार के कई सदस्यों ने एक ही दिन एक से अधिक कार्यों में मजदूरी की है। मामले का खुलासा सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत हुआ है। ग्रामीणों ने मामले की शिकायत मुख्य विकास अधिकारी से की, जिस पर पूरे प्रकरण की जांच कराई गई। जिला पंचायती राज अधिकारी का कहना है कि प्रकरण की जांच पूरी हो चुकी है। मामले में जल्द ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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विकासखंड खिर्सू के कटुलस्यूं पट्टी स्थित ग्राम पंचायत पोखरी पूर्व प्रधान नरेंद्र प्रसाद ममर्गाइं ने अपने कार्यकाल के दौरान वर्ष 2014-19 तक मनरेगा के विभिन्न कार्यों में मजदूरी की है, जबकि पंचायती राज अधिनियम के तहत प्रधान मनरेगा कार्यों में स्वयं मजदूरी नहीं कर सकते हैं, लेकिन ममगाईं ने इस नियम को धत्ता बता मनरेगा कार्यों में काम किया। इस दौरान ममर्गाइं ने एक ही तिथि में एक से अधिक कार्यों में मजदूर के तौर पर अपनी उपस्थिति दर्ज करा कर मजदूरी का भुगतान भी प्राप्त किया है।
ग्रामीण व आरटीआई कार्यकर्ता दिग्विजय सिंह व सुभाष चौहान ने बताया कि पूर्व प्रधान ममगाईं ने अपने कार्यकाल के दौरान दिव्यांग, बुजुर्ग व गांव से बाहर रह रहे प्रवासियों को भी मनरेगा के तहत कुशल श्रमिक के रूप में दर्शाया है। साथ ही उनके खातों में भुगतान भी किया है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस व होली पर्व जैसे अवकाश के दिनों को भी मनरेगा में कार्य दिवस के रूप में दिखाया गया है। उन्होंने पूर्व प्रधान पर अपने कार्यकाल के दौरान मृत व्यक्ति की हाजरी मनरेगा मजदूर के तौर पर लगाने का आरोप भी लगाया। मामले की शिकायत के बाद जिला पंचायत राज अधिकारी एमएम खान व स्वजल परियोजना प्रबंधक दीपक रावत की दो सदस्यीय टीम में प्रकरण की जांच की। डीपीआरओ खान ने बताया कि प्रकरण की जांच पूरी हो चुकी है। मामले में जल्द ही कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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