जनपद के नौ राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में जल्द ताले लटक सकते हैं। प्रशिक्षण सत्र 2019-20 के लिए इन संस्थानों में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। पिछले वर्ष भी इनमें से अधिकतर संस्थान बिना प्रवेश के ही रहे। विभाग इन संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों के तबादले करने में जुटा है। इससे भी इन संस्थानों के बंद होने की खबरों को बल मिल रहा है। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मामले में सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं। प्रभारी नोडल अधिकारी तकनीकी शिक्षा हितिका त्यागी ने बताया कि जनपद के नौ आईटीआई संस्थानों में प्रशिक्षण सत्र 2019-20 में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है, इसकी सूचना निदेशालय व शासन को भेज दी गई है।
जिले में 16 राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) संचालित किए जा रहे हैं। इनमें से नौ संस्थानों में प्रशिक्षण सत्र 2019-20 में एक भी प्रवेश नहीं हुआ है। जनपद के आईटीआई परसुंडाखाल, रिखणीखाल, पाबौ, कांसखेत, बूंगीधार, गैण्डखाल, यमकेश्वर, द्वारीखाल व पैठाणी संस्थान इनमें शामिल हैं। इन संस्थानों में से अधिकतर संस्थान प्रशिक्षण सत्र 2018-19 में भी बिना प्रवेश के ही रहे। तकनीकी शिक्षा प्रशासन इन संस्थानों के शिक्षकों का समायोजन अन्यत्र संस्थानों में कर चुका है। विगत दिनों आईटीआई पाबौ में तकनीकी शिक्षा प्रशासन के कर्मचारी फर्नीचर हटाने के लिए पहुंचे, लेकिन ग्रामीणों के जोरदार विरोध के बाद उन्हें बैरंग लौटना पड़ा। सामाजिक कार्यकर्ता बलवीर सिंह जैंतवाल ने बताया कि सरकार आईटीआई प्रशिक्षण संस्थानों को बंद करने की साजिश कर रही है।
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गोदियाल ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
पूर्व विधायक गणेश गोदियाल ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार आईटीआई बूंगीधार, पाबौ व पैठाणी को बंद किए जाने का गुपचुप आदेश जारी कर चुकी है। उन्होंने कहा कि ‘हमने क्षेत्र में विकास के पौधे रोपे थे, लेकिन सरकार उन पौधों की जड़ों में पानी डालने के बजाय उन्हें सुखाने का काम कर रही है’।