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श्रीनगर: मंदाकिनी घाटी में मिलीं ड्रोसोफिला की 13 नई प्रजातियां, पहली बार 37 प्रजातियों का हुआ डीएनए विश्लेषण

Tue, 13 Oct 2026 11:31 AM IST
Renu Saklani डॉ. श्रीकृष्ण उनियाल, संवाद न्यूज एजेंसी, श्रीनगर

सार

हिमालय की जैव विविधता को समझने की दिशा में वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। केदारनाथ क्षेत्र की मंदाकिनी घाटी में शोध के दौरान फलमक्खी की 13 नई प्रजातियों की पहचान की गई। 
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विस्तार
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हिमालय की जैव विविधता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक उपलब्धि सामने आई है। शोधकर्ताओं ने पश्चिमी हिमालय की केदारनाथ क्षेत्र की मंदाकिनी घाटी में विस्तृत अध्ययन किया। इस दौरान कुल 37 ड्रोसोफिलिड्स प्रजातियों की पहचान की गई और 13 नई प्रजातियों की खोज हुई।

इन प्रजातियों की पहचान के साथ पहली बार इनके मॉलिक्यूलर डीएनए विश्लेषण का अध्ययन भी किया गया। इससे इनकी वैज्ञानिक पहचान और जैविक संबंधों को अधिक प्रामाणिक तरीके से समझने में मदद मिली है। आकार में बेहद छोटी ड्रोसोफिला को आमतौर पर फलमक्खी कहते हैं। यह वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण जीव मानी जाती है। फलमक्खी का सबसे महत्वपूर्ण योगदान आनुवंशिकी के क्षेत्र में रहा है।

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फलमक्खी का उपयोग विकास, कोशिका-विज्ञान, तंत्रिका तंत्र, व्यवहार और रोगों से जुड़े शोध में भी होता है। गढ़वाल विवि के प्रो. राजेंद्र सिंह फर्त्याल और उनकी टीम ने अभी तक 56 नई ड्रोसोफिलिड प्रजातियां खोजी हैं। ये प्रजातियां उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, कश्मीर और पश्चिम बंगाल से मिली हैं। इनमें से अधिकांश प्रकाशित हो चुकी हैं, जबकि कुछ का अध्ययन जारी है।

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शोध प्रक्रिया और भविष्य की संभावनाएं

शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने मंदाकिनी घाटी के विभिन्न क्षेत्रों से जैविक नमूने एकत्र किए। उन्होंने इन नमूनों के पारंपरिक लक्षणों के साथ-साथ आणविक स्तर पर डीएनए की जांच की। आधुनिक मॉलिक्यूलर डीएनए विश्लेषण और डीएनए बारकोडिंग ने प्रजातियों की पहचान को मजबूत आधार दिया। यह शोध 7 अक्तूबर को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ट्रॉपिकल इंसेक्ट साइंस में प्रकाशित हुआ। शोधार्थी टीम में प्रो. फर्त्याल, डॉ. सोनाली खाली और डॉ. गौरव भट्ट शामिल रहे। दून विवि के स्कूल ऑफ बायोलॉजिकल साइंसेज से डॉ. विवेकानंद बहुगुणा भी इस टीम का हिस्सा थे।

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