पेयजल मंत्री एमपी नैथानी ने कहा कि 2016 तक पूरे प्रदेश को पेयजल
किल्लत से मुक्त कर दिया जाएगा। विश्व बैंक की सहायता से राज्य के
प्राकृतिक स्रोतों का संरक्षण किए जाने की योजना बनाई जा रही है।
उन्होंने केंद्र सरकार पर पेयजल योजनाओं के लिए सहयोग न करने का आरोप भी लगाया। सोमवार को श्रीनगर पहुंचे शिक्षा व पेयजल मंत्री ने अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली।
इस दौरान पालिका अध्यक्ष विपिन मैठानी ने शहर में पेयजल किल्लत के लिए जल संस्थान के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया। सभासद जितेंद्र रावत ने कहा कि जल विद्युत परियोजना कंपनी ने श्रीनगर क्षेत्र की पेयजल व्यवस्था के लिए 14 करोड़ देने का अनुबंध किया था।
मगर मात्र एक करोड़ ही दिया। इस पर नैथानी ने जीवीके कंपनी नोटिस देने तथा जिलाधिकार को कंपनी प्रबंधन के साथ बैठक कर मामले को सुलझाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य में पेयजल योजनाओं के निर्माण के लिए 750 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर केंद्र सरकार को भेजा था। केंद्र ने मात्र 50 करोड़ स्वीकृत किए। इससे राज्य में पेयजल योजनाओं के निर्माण की गति पर प्रभाव पड़ा है।
मंत्री के सामने भिड़े अधिकारी
लोक निर्माण विभाग के गेस्ट हाउस में समीक्षा बैठक के दौरान जल संस्थान और यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों में बहस के बाद हाथापाई की नौबत आ गई।
रविवार देर शाम काबीना मंत्री ने विभिन्न विभागों की बैठक बुलाई थी। बैठक में मंत्री ने कोटेश्वर झंडीधार पेयजल योजना के प्रगति जानी। इस पर यांत्रिकी विभाग के अधिशासी अभियंता जितेंद्र सिंह ने योजना का मुख्य टैंक छह घंटे की पंपिंग से भरने की बात कही। इसके बाद जल संस्थान के अधिशासी अभियंता नमित रमोला ने बताया कि मुख्य टैंक को भरने में 16 घंटे लगाता है।
इसी बात पर दोनों अधिकारियों में नोकझोंक हो गई। इसके बाद नैथानी ने अधीक्षण अभियंता जल संस्थान राकेश उनियाल, जल निगम के अधिशासी अभियंता डीएस पुरोहित को योजना की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा।