शासन ने मलेथा में तीन स्टोन क्रशरों को निरस्त करने का शासनादेश जारी कर दिया गया है।
बावजूद इसके अंादोलनकारी चार स्टोन क्रशरों को निरस्त करने और एक क्रशर की जांच करने पर अड़े हैं। अनशनकारी समीर रतूड़ी ने कहा कि मुख्यमंत्री के वादे के अनुसार शासनादेश जारी नहीं हुआ है।
वादे के अनुसार चार स्टोन क्रशर के निरस्त होने पर ही वह अनशन समाप्त करेंगे।
वहीं, पूर्व राजस्व मंत्री दिवाकर भट्ट ने भी धरनास्थल पर पहुंचकर सीएम से अपने वादे को पूरा करने की मांग की। कहा कि ऐसा नहीं होने पर वह भी 13 फरवरी से क्रमिक अनशन पर बैठ जाएंगे।
स्टोन क्रशरों की अनुमति रद्द करने की मांग को लेकर 72 महिलाओं ने कीर्तिनगर कोतवाली में गिरफ्तारी दी।
मलेथा में स्वीकृत/संचालित पांच स्टोन क्रशरों के निरस्त करने की मांग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से आंदोलित हैं। सीता देवी के आमरण अनशन से उठने के बाद हिमालय बचाओ आंदोलन के समीर रतूड़ी 30 जनवरी से अनशन पर हैं।
मंगलवार को आंदोलनकारियों से दूरभाष पर वार्ता में सीएम हरीश रावत ने चार स्टोन क्रशरों की अनुमति निरस्त करने और कोर्ट में मामला होने के कारण एक की जांच का आश्वासन दिया था।
बुधवार को दोबारा दूरभाष पर वार्ता में सीएम अपने वादे से पलट गए। उन्होंने तीन क्रशर की अनुमति निरस्त करने, एक क्रशर पर चर्चा के बाद निर्णय लेने और एक अन्य की जांच का आश्वासन दिया था।
बृहस्पतिवार को आंदोलनकारियों को विश्वास था कि सीएम वादा पूरा करेंगे, लेकिन देर शाम आंदोलनकारियों के पास पहुंचे जीओ (शासनादेश) में सिर्फ तीन क्रशरों को निरस्त करने और दो पर यथासमय निर्णय लेने की बात कही गई है। रतूड़ी ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सीएम अपना वादा पूरा करे, तो हम भी अपना वादा पूरा करेंगे।