पौड़ी। जिले के विभिन्न विकासखंडों में बीते माह 48 बच्चे अतिकुपोषित और कुपोषित पाए गए। जिसमें 18 अतिकुपोषित व 30 कुपोषित शामिल हैं। सबसे अधिक 8-8 प्रभावित बच्चे दुगड्डा व द्वारीखाल ब्लॉक में हैं। वहीं इस वित्तीय वर्ष जिले में कुल 157 बच्चे कुपोषित मिले। जिसमें 95 का उपचार कर उन्हें सामान्य/स्वस्थ्य श्रेणी में शामिल किया गया।
बाल विकास विभाग की रिपोर्ट की मानें तो इस वित्तीय वर्ष जनपद की सभी 1853 आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 9461 का स्वास्थ्य परीक्षण करवाया गया। जिसमें से जिले में 157 बच्चों में कुपोषण के लक्ष्ण मिले। उपचार के बाद 95 बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से मुक्त कर सामान्य/स्वस्थ्य श्रेणी में शामिल किया गया। जबकि बीते जनवरी माह में हुए स्वास्थ्य परीक्षण में 62 बच्चों में कुपोषण की शिकायत मिली है। जिसमें से 24 अतिकुपोषित व 38 कुपोषित मिले। जबकि फरवरी में कुल कुपोषितों की संख्या 48 रही। जिसमें 18 अति कुपोषित व 30 कुपोषित रहे।
ये योजनाएं हो रही हैं संचालित
विभाग की मानें तो शासन की ओर से बच्चों के विकास को लेकर तीन प्रमुख योजनाएं संचालित की जा रही हैं। जिसमें मुख्यमंत्री बाल पलाश योजना, मुख्यमंत्री आंचल अमृत योजना व गेहूं -चावल आधारित योजना शामिल हैं। इन योजनाओं के तहत 3 से 6 साल तक के बच्चों को 20 ग्राम केला, चिप्स, अंडे, दूध व अनाज आदि मुहैया करवाए जाते हैं।
किस ब्लॉक में कितने कुपोषित हैं बच्चे
विकासखंड कुल बच्चे अतिकुपोषित कुपोषित
दुगड्डा 8 4 4
द्वारीखाल 8 3 5
कोट 5 0 5
नैनीडांडा 4 0 4
जयहरीखाल 2 0 2
बीरोंखाल 5 2 3
पाबौ 4 2 2
रिखणीखाल 3 3 0
यमकेश्वर 3 0 3
थलीसैंण 1 0 1
पाैड़ी 2 2 0
एकेश्वर 1 0 1
खिर्सू 2 2 0
पोखड़ा 1 0 1
क्या कहते हैं अफसर
सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर हर माह परीक्षण करने को कहा गया है। कहीं भी कुपोषित बच्चों की शिकायत मिलती है तो उन्हें पोषाहार के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी उपचार मुहैया करवाया जाता है। विभाग की ओर से पोषाहार व दवा आदि मुहैया करवाने के बाद बच्चे स्वस्थ हो जाते हैं। - डीपी थपलियाल, जिला बाल विकास अधिकारी, पौड़ी।