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शिकारी दल ने आदमखोर गुलदार को मार गिराया

Sun, 29 Nov 2015 09:34 PM IST
यमकेश्वर/कोटद्वार
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लैंसडौन वन प्रभाग के लालढांग रेंज में दहशत का पर्याय बने आदमखोर गुलदार को शिकारी दल ने छठवें दिन मार गिराया। रविवार को वन विभाग ने दो पशु चिकित्सकों की टीम से शव का पोस्टमार्टम कराने के बाद उसे जलाकर नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने क्षेत्र में लगाए गए दो पिंजरे यथावत लगाए रखने के निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में दो बच्चों को निवाला बनाने के बाद वन विभाग ने उसे आदमखोर घोषित किया था।
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कोटद्वार के सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) जेएस रावत ने बताया कि 23 नवंबर को धारकोट ग्राम पंचायत के गढ़ाकोट में आठ साल की बच्ची संतोषी को निवाला बनाने के बाद से वन विभाग ने गुलदार को आदमखोर घोषित कर दिया था। 24 नवंबर को वन विभाग का शिकारी दल मौके पर पहुंच गया था। इन तीन चार दिनों में आदमखोर की पहचान कर ली गई थी, लेकिन वह नजर नहीं आ रहा था। शनिवार की रात धारकोट से तीन किलोमीटर दूर गढ़ाकोट के बैड़खाल में पुराने धारकोट-लालढांग मार्ग पर आदमखोर को शिकारी दल ने मार गिराया। उसे मारने के लिए क्षेत्र में तीन मचान और दो पिंजरे लगाए गए थे। शिकारी दल में कानपुर के नवाब सैफी, रसीद, खालिद, पौड़ी के प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकिल, दयाल सिंह के साथ ही वन विभाग के वन दारोगा बलवीर सिंह पंवार और चंद्रमोहन सिंह रावत शामिल हैं।  
एसीएफ जेएस रावत ने बताया कि आदमखोर मादा गुलदार की उम्र आठ से नौ साल के बीच है। उसका एक कैनाइन (लंबा वाला दांत) टूटा हुआ था। इसके अलावा दोनों जबड़ों के कई और दांत टूटे थे। एक दांत घिसा हुआ था। 23 नवंबर को गढ़ाकोट में देव सिंह की आठ साल की पुत्री संतोषी के शरीर पर जो तीन दांत पाए गए थे, वे इसी गुलदार के थे। जबड़ों के दांत टूटने के कारण ही वह वन्यजीवों का शिकार नहीं कर पा रहा था।
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गुलदार के मरने की खबर मिलते ही धारकोट के प्रधान जगमोहन सिंह रावत, बीडीसी मेंबर गजेंद्र सिंह समेत क्षेत्र के लोगों ने शिकारी दल को फूल माला पहनाकर सम्मानित किया। यमकेश्वर और मोहनचट्टी के पशु चिकित्साधिकारियों क्रमश: डा. दिनेश शर्मा और डा. अमित कुमार ने गुलदार का पोस्टमार्टम किया। लालढांग के रेंज अधिकारी रमेश भारती ने कहा कि जब तक लोगों के मन से गुलदार का खौफ पूरी तरह से नहीं जाता, तब तक क्षेत्र में तीनों पिंजरे लगे रहेंगे।
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