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कांडा मेले में पहले दिन चढ़े 15 से ऊपर निशाण

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कांडा में मंजूघोष मेले के दौरान मंदिर की परिक्रमा करती महिलाएं। - फोटो : SHRINAGAR
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मंजूघोषेश्वर महादेव मंदिर में कांडा मेला शुरू
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कांडा मेले में पहले दिन चढ़े 30 से ऊपर निशाण
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। विकासखंड कोट के कांडा स्थित मंजूघोषेश्वर महादेव मंदिर में दो दिवसीय मंजूघोष मेला शुरू हो गया है। सोमवार को छोटा कांडा मनाया गया। जिसमें 30 से ऊपर निशाण चढ़ाए गए। जबकि भैया दूज (आज) के मौके पर बड़ा कांडा मेला लगेगा।
श्रीनगर से करीब 13 किमी दूर कांडा में हर साल दीपावली के अगले दिन दो दिवसीय (बड़ा व छोटा कांडा) मंजूघोष मेला लगता है। कांडा गांव में मंजूघोष, महाकाली व मंजूदेवी मंदिर स्थित हैं। इस मेले में दूर दराज से श्रद्धालु निशाण लेकर पहुंचते हैं। मंजूघोष मेला कांडा मेले के नाम से प्रसिद्ध है। दीपावली के दूसरे सोमवार को परंपरानुसार छोटा कांडा मेला शुरू हुआ। मजीन कांडा सेवा समिति के अध्यक्ष द्वारिका प्रसाद भट्ट ने बताया कि पहले दिन लगभग 30 निशाण (देवताओं के प्रतीक चिन्ह) चढ़ाए गए। सबसे पहले मर्गुण से मंदिर में छत्र और निशाण चढ़ाए गए। मंदिर में लयोटा, डांग, झिरकोटी, कांडा, तैला व सांपला आदि गांवों से लोग निशाण और छत्र लेकर आए। मेले में भीड़ को देखते भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है।
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यह है मान्यता
मंजूघोष महादेव मंदिर कामदाह डांडा पर स्थित है। शिव पुराण के अनुसार इस पर्वत पर भगवान शंकर ने घोर तपस्या की थी। कामदेव ने उनकी तपस्या को भंग करने के लिए फूलों के वाण चलाकर उनके अंदर कामशक्ति को जागृत किया था। भगवान शंकर ने क्रोधित होकर कामदेव को भष्म कर दिया। तबसे इस पर्वत को कामदाह पर्वत कहा जाता है। जो कालांतर में कांडा हो गया। वहीं एक और अन्य कथा प्रचलित है कि मंजू नाम की एक अप्सरा ने शक्ति प्राप्त करने के लिए भगवान शिव की तपस्या की थी। मंजू पर श्रीनगर का राजा कोलासुर मोहित हो गया। जब वह अपने मकसद में सफल नहीं हुआ, तो उसने भैंसे का रूप धरकर ग्रामीणों पर हमला कर दिया। मंजूदेवी को यह सहन नहीं हुआ। उन्होंने महाकाली का रूप धारण कर कोलासुर का वध कर दिया। तब से कांडा मेला मनाया जाता है।
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