उत्तराखंड में ‘पाणी राखो’ आंदोलन के प्रणेता और पथरीली जमीन को हरा-भरा बनाने वाले पर्यावरणविद् सच्चिदानंद भारती को जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए दुनिया की जानी-मानी संस्थाओं डब्लूडब्लूएफ और इंटेक की ओर से दिल्ली के जल संसाधन मंत्री कपिल मिश्रा ने भगीरथ प्रयास सम्मान से नवाजा है। सम्मान के रूप में भारती को एक प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न के साथ राजा भगीरथ के साठ हजार पुरखों के प्रतीक के रूप में साठ हजार रुपये की नकद धनराशि से पुरस्कृत किया गया।
नई दिल्ली के लोधी स्टेट स्थित इंटेक सभागार में शनिवार को आयोजित इस कार्यक्रम में सच्चिदानंद भारती के जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों की सराहना की गई। दिल्ली के जल संसाधन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि भारती ने उत्तराखंड में ‘पाणी राखो’ कार्यक्रम के जरिए अनुकरणीय कार्य किया है। कई गांवों में जंगल तैयार करने और सूखे स्रोतों को रिचार्ज करने वाले भारती को यह सम्मान उनके अथक प्रयासों के लिए दिया जा रहा है।
बीरोंखाल ब्लाक (जिला पौड़ी) के गाडखर्क गांव के मूल निवासी पर्यावरणविद् और सेवानिवृत्त शिक्षक सच्चिदानंद भारती को गत फरवरी माह में भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय की ओर से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय पर्यावरण पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। कई सालों से भारती कोटद्वार के भाबर स्थित घमंडपुर गांव में निवास कर रहे हैं।
क्या है ‘पाणी राखो’ आंदोलन
सच्चिदानंद भारती ने वर्ष 1989 में बीरोंखाल के उफरैंखाल में यह आंदोलन शुरू किया। इसके तहत उन्होंने छोटे-छोटे चाल-खाल बनाए जिनमें बरसाती पानी को रोककर उन्होंने क्षेत्र में करीब 30 हजार खाल बनाए। इन्हें उन्होंने जल तलैया नाम दिया। उसके आस-पास बांज, बुरांस और उत्तीस के पेड़ लगाए। परिणाम यह हुआ कि दस साल बाद सूखा गदेरा सदानीर नदी में बदल गया, जिसे उन्होंने ‘गाड गंगा’ नाम दिया गया। गदेरे में तब से लगातार पानी चल रहा है।