गढ़वाल विवि के वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग चौरास परिसर ने ग्रामीणों की बंजर भूमि को व्यवसायिक वानिकी मॉडल के रूप में विकसित करने की मुहिम शुरू कर दी है। विभाग ने इसका शुभारंभ कांडीखाल के पास एक हेक्टेयर बंजर भूमि पर 500 पौधे रोपे।
गढ़वाल विवि के वानिकी एवं प्राकृतिक संसाधन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. अजीत कुमार ने बताया कि अपना वन का आर्थिक मॉडल पर्यावरण संवर्द्धन एवं सुरक्षा के अतिरिक्त आर्थिक दृष्टि से भी अधिक महत्वपूर्ण। कांडीखाल के पास ग्रामीणों की मदद से 20 वर्षों तक शोध के माध्यम से अपने वन को विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। 10 वर्ष बाद इस वन से प्रतिवर्ष चार से पांच लाख की आय का अनुमान है। इस मौके पर अपना वन स्वामी एवं पूर्व प्रधान राकेश शाह ने वानिकी विभाग के इस कार्य की सराहना की है। इस मौके पर टिहरी दुग्ध संघ के पूर्व अध्यक्ष पदम सिंह कुमांई, डा. डीएस चौहान, डा. आरएस नेगी, डा. जेएस बुटोला, डा. हिमशिखा गुसांई, अजीत सिंह नैनवाल, रामप्रकाश राणा, विजय कुमार, गोविंद सिंह आदि मौजूद थे।