मैदानी क्षेत्रों से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के मुख्य खाद्यान्न भंडार गृह में आ रहे खाद्यान्न के ट्रक चालकों व क्लीनर की स्क्रीनिंग नहीं हो रही है। खानापूर्ति के लिए दरवाजे में सिर्फ वाहन चालकों व क्लीनरों के हाथ धुलाए जा रहे हैं। ट्रकों को सैनिटाइज करने की की कोई व्यवस्था नहीं है। स्थिति यह है कि एफसीआई में कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए छिड़की जाने वाली सोडियम हाइपोक्लोराइड भी उपलब्ध नहीं है। पहले चरण की लॉकडाउन की अवधि खत्म होने के बाद एफसीआई अब दवा तलाश रहा है।
श्रीनगर के धोबीघाट में एफसीआई का गढ़वाल खाद्यान्न भंडार गृह है। पौड़ी, चमोली, टिहरी व रुद्रप्रयाग जिलों के लिए आवंटित होने वाले खाद्यान्न की इसी भंडार गृह में आपूर्ति होती है। आजकल प्रतिदिन 30 से 40 ट्रक गेंहू और चावल लेकर यहां पहुंच रहे हैं। सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर यहां पहुंचे ट्रकों को भंडार गृह के गेट पर सैनिटाइज करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ट्रक ड्राइवरों ने बताया कि एफसीआई के मुख्य गोदाम से चलते हुए ट्रक सैनिटाइज किए जाते हैं। पहाड़ में ऋषिकेश में उनका नाम-पता पूछा जाता है। कुछ का कहना है कि डिजीटल थर्मोमीटर से चेक किया गया। जबकि कुछ ने मना किया। वहीं, इस लापरवाही से भंडार गृह में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी खतरा है। वह ट्रक के चालान से लेकर अन्य काम करते हैं।
भंडार गृह के उप प्रबंधक एसएस रावत ने बताया कि बाजार में सोडियम हाइपोक्लोराइड नहीं मिल पाई। तहसील प्रशासन से उक्त रसायन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। वहीं एसडीएम दीपेंद्र नेगी का कहना है कि जैसे सभी विभाग अपने स्तर से रसायन मंगवा रहे हैं। उसी प्रकार एफसीआई को मंगाना चाहिए।