प्रगतिशील जन मंच के आह्वान पर श्रीकोट-श्रीनगर बंद सफल रहा। नगर क्षेत्र में सरकारी- गैर सरकारी विद्यालय, संस्थान व व्यवसायिक प्रतिष्ठान पूर्ण रूप से बंद रहे। शहर में पुलिस दिन भर पूरे क्षेत्र में पेट्रोलिंग करती रही।
नगर क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए प्रगतिशील जनमंच 20 सितंबर से आंदोलित है। 30 अक्तूबर को पौड़ी में जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव करने के बाद मंगलवार को श्रीनगर व श्रीकोट बंद का आह्वान किया गया था। सभी सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों ने पहले ही छात्रों को अवकाश की सूचना दे दी थी।
बैंक व संस्थाएं भी बंद रही। करीब 12 बजे आंदोलन स्थल रोडवेज बस अड्ड़े पर हुई सभा में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार की कार्यशैली पर आक्रोश जताया। कहा कि सरकार गैरसैंण-गैरसैंण चिल्ला रही है, लेकिन राज्य के लोगों को शुद्ध पेयजल तक उपलब्ध नहीं करवा पा रही है। सभा के बाद आंदोलनकारी रैली की शक्ल में गोलापार्क तक पहुंचे। यहां हुई सभा में पूर्व पालिका अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी, प्रेमबल्लभ नैथानी, छात्रसंघ अध्यक्ष मनोज रावत, छात्र महासंघ सचिव आशीष नेगी, हरि सिंह बिष्ट, जगदंबा प्रसाद रतूड़ी, प्रदीप तिवाड़ी, अनूप बहुगुणा, पंकज सती, जगदीप रावत, विभोर बहुगुणा, विजयलक्ष्मी रतूड़ी, अंकित कपरवाण आदि शामिल थे। जनसभा का ंचालन नवीन नौटियाल ने किया।
इन मांगों के लिए हो रहा आंदोलन
श्रीनगर। प्रगतिशील जनमंच श्रीकोट, श्रीनगर व पौड़ी शहर सहित जिले के दर्जनों गांवों में शुद्ध पेयजल आपूर्ति, एनआईटी के स्थायी परिसर का निर्माण सुमाड़ी में जल्द शुरू करने, मेडिकल कालेज व संयुक्त चिक्तिसालय की व्यवस्थाएं दुरस्त करने, रोडवेज डिपो का संचालन श्रीनगर से करने और आईटीआई व खाद्या गोदाम परिसर का मलबा साफ करने की मांग कर रहा है।
चाय के लिए भी तरसे यात्री
श्रीनगर। श्रीकोट-श्रीनगर बंद होने के दौरान यात्री चाय तक के लिए तरस गए। कई लोग दुकानों के खुले होने की आस में इधर से उधर भटकते रहे। मेडिकल स्टोर खुले होने से लोगों को मिनरल वाटर उपलब्ध हो पाया।
एनआईटी में बंद को लेकर हुई तनातनी
श्रीनगर। एनआईटी में शिक्षण कार्य बंद कराने पहुंचे आंदोलनकारियों की एनआईटी प्रशासन से तीखी नोक-झोंक हो गई। एनआईटी निदेशक के परिसर बंद कराने से इंकार करने पर आंदोलनकारी भड़क गए। इस दौरान आंदोलनकारियों ने निदेशक कार्यालय में धरना- प्रदर्शन व नारेबाजी भी की। बाद में शिक्षण कार्य बंद करने पर ही आंदोलनकारी निदेशक कार्यालय से बाहर निकले।
एनआईटी में शिक्षण कार्य होने पर आंदोलनकारी एनआईटी परिसर पहुंचे। उन्होंने एनआईटी के निदेशक प्रो. एचटी थोराट से शिक्षण कार्य बंद कराने के लिए कहा। प्रो. थोराट के साफ इंकार करने पर आंदोलनकारी भड़क गए। इस दौरान आंदोलनकारियों की कुलसचिव कर्नल सुखपाल सिंह से तीखी नोक-झोंक हुई। मामला बढ़ता देख पुलिस ने किसी तरह मामला शांत कराया। शिक्षण कार्य बंद कराने पर मामला शांत हुआ। विरोध प्रदर्शन करने वालों में जनमंच के अध्यक्ष अनिल स्वामी, पंकज सती, नरेश नौटियाल, सुधीर जोशी, ऋतांशु कंडारी, कमलेश थपलियाल, कुलदीप चौहान, आयुष नेगी आदि शामिल थे।