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राजनीतिक विज्ञान विभाग में पर्यावरण प्रभाव आंकलन ड्राफ्ट 2020 पर हुई परिचर्चा

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गढ़वाल विवि के राजनीति विज्ञान विभाग में पर्यावरण प्रभाव आकलन ड्राफ्ट 2020 पर एक दिवसीय परिचर्चा हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने कहा कि यह ड्राफ्ट पर्यावरण संबंधी नियमों में कई बदलाव पेश करता है। जो कि आने वाले दिनों में पर्यावरण और विकास की बहस को एक नया मोड़ देगा।
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रविवार को आयोजित परिचर्चा का शुभारंभ करते हुए राजनीति विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एमएम सेमवाल ने पर्यावरण कानून को मजबूत किए जाने पर जोर देने को कहा। उन्होंने नए कानून को कमजोर बताते हुए कहा कि परियोजना शुरू होने से पहले पुराने कानून में जन सुनवाई के लिए 30 दिनों का समय दिया जाता था, लेकिन नए ड्राफ्ट में इसे 20 दिन किया गया है। परिचर्चा में मानविकी एवं समाज विज्ञान संकाय के डीन प्रो. सीएस सूद ने कहा कि पूरी दुनिया में जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या है। वहीं डॉ. नरेश कुमार ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर हम अपने गांव से लेकर दुनिया भर में अलग-अलग रूपों में देख सकते हैं। हमारे आसपास फसलों के समय में जो बदलाव आया है वह जलवायु परिवर्तन का ही असर है। परिचर्चा में राजनीति विज्ञान विभाग के शोधार्थी मनस्वी सेमवाल, शिवानी पांडेय, मयंक उनियाल, शहिल पाठक, सुशील कुमार, शुभम कुमार आदि ने कहा कि इस कानून में कई परियोजनाओं को पर्यावरण मंत्रालय की मंजूरी से बाहर रखा गया है। परियोजना में कुछ गड़बड़ी की आशंका होने पर सरकार या परियोजना निर्माणदायी संस्था को ही शिकायत करने का अधिकार दिया गया है। जो कि स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन है। परिचर्चा का संचालन शोध छात्रा लूसी लोहिया ने किया।
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