जम्मू। कोऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन मोहम्मद शफी डार को करोड़ों रुपये के घोटाले में राहत मिलती नजर नहीं आ रही। चेयरमैन ने घोटाले को लेकर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका कोर्ट में दायर की थी। जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। बुधवार को जस्टिस विनोद चटर्जी कौल ने अर्जी पर सुनवाई की।
जज ने कहा कि इस मामले की जांच अभी जारी है। जांच एजेंसी सबूत एकत्र कर रही है। जांच जरूरी है और इसे रोक नहीं सकते। इस समय जांच रोकना संभव नहीं। अपीलकर्ता कोई ऐसा आधार नहीं बता पाया कि जांच रोकी जाए।
शुरूआती जांच के तहत पता चला कि हिलाल अहमद मीर को 223 करोड़ रुपये का लोन दिया गया। लोन बैंक के चेयरमैन मोहम्मद शफी की मिलीभगत से दिया गया। एंटी करप्शन ब्यूरो के अनुसार मीर ने कोआपरेटिव सोसायटी के पास आवेदन किया कि कोआपरेटिव बैंक को आदेश दिया जाए कि उसे 300 करोड़ की वित्तीय सहायता दें, ताकि वह 300 कनाल जमीन पर टाउनशिप तैयार कर सके। यह आवेदन सोसायटी के रजिस्ट्रार को भेजा गया कि वह कोआपरेटिव बैंक से बात करें। श्रीनगर कोआपरेटिव बैंक ने मीर के फेवर में 223 करोड़ रुपये का लोन मंजूर कर दिया, जबकि इसके लिए कोई औपचारिकता पूरी नहीं की। बैलेंस शीट, मुनाफा नुकसान अकाउंट, सोसायटी की गतिविधियां, पैन नंबर, आयकर रिटर्न का भी लोन मंजूर करते वक्त ध्यान नहीं रखा गया। यह भी बताया गया कि झेलम कोआपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटी राज्य कोआपरेटिव सोसायटी के साथ रजिस्टर भी नहीं है। मीर और बैंक के चेयरमैन ने औपरचारिकताओं को पूरा किए बिना ही लोन का हेरफेर किया।