जम्मू। घरेलू, बाल हिंसा और बुजुर्गों के मामलों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति राजेश ओसवाल की खंडपीठ ने मंगलवार को जनहित याचिका पर सुनवाई की। इसमें सभी ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिए कि वे पीड़ितों को सहायता राशि के भुगतान के आदेश सुनिश्चित करने के लिए उचित तंत्र विकसित करें।
खंडपीठ ने कहा कि ट्रायल कोर्ट किसी भी तरह से इसका आदेश दे सकते हैं। वह चाहें तो इसके लिए लैंडलाइन फोन का इस्तेमाल करें, मोबाइल फोन का इस्तेमाल करें या ईमेल करें। साथ ही कहा, जिसके पक्ष में सहायता राशि के आदेश पारित हैं, उसका भी अनुपालन हो। इससे पहले भुगतान संबंधी रिपोर्ट पेश करने के लिए कोर्ट से वक्त मांगा गया, जिस पर कोर्ट ने सरकारी पक्ष को अगली तारीख तक का समय दिया है। इससे पहले 13 मई को कोर्ट ने स्टेट लीगल सर्विस अथारिटी के मेंबर सेक्रेटरी को पैरा 9 के तहत रिपोर्ट पेश करने को कहा था जोकि अभी तक नहीं की गई। अथॉरिटी को आदेश दिया कि वह ऐसे लोगों की मदद करते रहें।