जम्मू-कश्मीर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रसार को देखते हुए संक्रमित मामलों की निगरानी व्यवस्था में बदलाव लाया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश में अब कंटेनमेंट/रेडजोन के बजाय माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाए जाएंगे। इसमें संक्रमित मामले के आसपास के 4-5 घरों को ही सील किया जाएगा, जबकि इससे पहले कंटेनमेंट/रेडजोन में पूरे इलाके या मोहल्ले को सील करके पाबंदियां लगाई जाती थीं। दिल्ली सहित अन्य कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में माइक्रो कंटेनमेंट जोन की रणनीति अपनाई जा रही है। इसके बेहतर नतीजे आए हैं।
प्रदेश में हाल ही में केंद्रीय टीम ने जम्मू-कश्मीर में माइक्रो कंटेनमेंट जोन का सुझाव दिया था, जिस पर स्वास्थ्य निदेशालय जम्मू और कश्मीर काम करने के लिए रणनीति बना रहा है। पहले जब भी किसी इलाके को रेड जोन/कंटेनमेंट जोन घोषित किया जाता था, तो पूरे क्षेत्र को सील कर गली के बाहर बैरिकेडिंग की जाती थी। इस व्यवस्था में कई कंटेनमेंट जोन का क्षेत्र बड़ा होने के कारण निगरानी करने में परेशानी होती है। इसके अलावा कंटेनमेंट जोन के भीतर लोग एक-दूसरे के घरों पर जाकर संक्रमण का प्रसार करते हैं। इससे संक्रमण पर नियंत्रण नहीं हो पाता है।
माइक्रो कंटेनमेंट जोन में किसी गली या मोहल्ले में जहां संक्रमण के अधिक मामले आते हैं, उसके आसपास के कुछ घरों को सील करके निगरानी की जाती है। इससे संभावित क्षेत्र की निगरानी आसानी से होती है और संक्रमण के बाहर जाने का खतरा कम होता है।
इसमें प्रशासन की ओर से सील किए गए घरों में सभी सुविधाएं उपलब्ध करवाना सुनिश्चित किया जाता है। दिल्ली में कोरोना के कम मामले होने में माइक्रो कंटेनमेंट जोन की रणनीति कारगर साबित हुई है। माइक्रो कंटेनमेंट जोन पर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहती है। कश्मीर के बाद जम्मू संभाग में भी बिना लक्षण वाले संक्रमित मामलों को घर पर आइसोलेशन करने की रणनीति अपनाई गई है। स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डा. रेणु शर्मा ने कहा कि माइक्रो कंटेनमेंट जोन बनाने का सुझाव आया है और इस पर रणनीति बनाई जा रही है। कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाने के लिए सभी उचित प्रयास किए जा रहे हैं।