राज्य के 16वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय से जुड़े राष्ट्रीय वन विद्यार्थी समूह (एनएफएस) की गोष्ठी में वक्ता छात्र-छात्राओं ने उनकी पेड़ लगाओ और बचाओ मुहिम से जुड़ने का आह्वान किया। वक्ताओं ने कहा कि उत्तराखंड के विकास में वन संरक्षण का व्यापक महत्व है। वन एवं वन्यजीवों ने सूबे को दुनियाभर में एक नई पहचान दिलाई है। विकास की दौड़ में पर्यावरण संरक्षण पीछे नहीं छूटना चाहिए।
गोष्ठी के मुख्य अतिथि भूगोल विभागाध्यक्ष डॉ. डीएस नेगी और विशिष्ट अतिथि अर्थशास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ. जेएस नेगी ने कहा कि उत्तराखंड में जैव विविधता, जल और जंगल को संरक्षित करने में एनएफएस की महत्वपूर्ण भूमिका है। इसे जारी रखा जाना चाहिए। गोष्ठी का संचालन करते हुए श्रीकांत कुकरेती ने कहा कि एनएफएस छात्र समूह न केवल पेड़ लगाता है, बल्कि लगाता उनके संरक्षण के लिए कार्य कर रहा है। आश्विन कुकरेती ने एनएफएस के कार्यों की प्रशंसा करते हुए हर छात्र-छात्रा को इससे जुड़ने का आह्वान किया। छात्रसंघ अध्यक्ष ऐश्वर्या चौहान ने कहा कि वनों के संरक्षण के बिना उत्तराखंड के विकास की कल्पना नहीं की जा सकती। वनों के संरक्षण के चलते ही उत्तराखंड में छह राष्ट्रीय उद्यान, सात अभयारण्य समेत आरक्षित वन यहां की शोभा बढ़ा रहे हैं, जहां वन्यजीवों का मोहक संसार देखने देश विदेश के लोग हर साल बड़ी संख्या में आते हैं।
अंग्रेजी प्राध्यापिका डॉ. वंदना चौहान ने वनों की महत्ता पर प्रकाश डाला। कहा कि ग्लोबल वार्मिंग जैसी अंतरराष्ट्रीय समस्या से निजात पाने के लिए पर्यावरण संरक्षण जरूरी है, जिसके लिए अधिक से अधिक पौधरोपण और उनका संरक्षण जरूरी है।
गोष्ठी में एनएफएस के संस्थापक डॉ. किशोर चौहान ने अमर उजाला की पहल का स्वागत किया। कहा कि पौधरोपण और वन संरक्षण को पाठ्यक्रम में शामिल करने के साथ ही विद्यार्थियों को इससे व्यावहारिक रूप से जुड़ने की जरूरत है। गोष्ठी में रचना ढौंडियाल, नवीन लखेड़ा, अमित सिंह, अभिषेक राणा, अंकिता मिंया, रोहित रावत, बबीता, ज्योति, प्रतिभा, साक्षी, रश्मि, सपना, अभिषेक राणा और देवाशीष ने विचार रखे।