राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल की बायोकेमेस्ट्री लैब में मरीजों की महत्वपूर्ण जांच नहीं हो पा रही है। अस्पताल मेें जांच न होने पर मरीजों को निजी पैथोलॉजी केंद्रों में उक्त जांच के लिए लगभग 10 गुना अधिक रकम खर्च करनी पड़ रही है। जांच न होने की वजह मशीनों में तकनीकी गड़बड़ी बतायी जा रही है। स्थिति यह है कि 15 दिन बाद भी खराब मशीनों की मरम्मत नहीं हो पायी है।
बेस अस्पताल में इन दिनों लीवर से संबंधित एलएफटी (लीवर फंक्शन टेस्ट), पेट/अग्नाशय से संबंधित एमाइलेज व लाइपेज, इलेक्ट्रोलाइट, लिपिड प्रोफाइल और यूरिक एसिड टेस्ट ठप हैं। उक्त सभी परीक्षण बायोकेमेस्ट्री लैब में होते हैं। लैब में चंद परीक्षण ही हो पा रहे हैं। दिक्कत यह है कि इन दिनों जो परीक्षण नहीं हो पा रहे हैं, अस्पताल में ज्यादातर मरीज इन्हीं से संबंधित आते हैं। अस्पताल में उक्त जांच 10 से 150 रुपये में होती है। जबकि निजी पैथोलॉजी में यह जांच काफी मंहगी पड़ रही हैं। निजी केंद्रों में इन जांचों के लिए 500 से एक हजार रुपये देने पड़ रहे हैं। इधर, राजकीय मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि विभाग से देरी मेें मशीन खराब होने की सूचना मिली। सूचना मिलने पर इंजीनियर को बुलाया गया था, लेकिन मशीन में कुछ अन्य दिक्कत भी आ गयी। इसलिए वक्त लग गया।