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भाषाओं का संरक्षण जरूरी : भरतवाण

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श्रीनगर में अंर्तराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते वक्ता - फोटो : SHRINAGAR
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लोकगायक पद्मश्री प्रीतम भरतवाण ने कहा कि भाषाओं का संरक्षण बहुत आवश्यक है। लोग आधुनिकता की देखादेखी में मातृ भाषाओं की उपेक्षा कर रहे हैं। जोकि हमारी सांस्कृतिक पहचान के लिए नुकसानदेह है।
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मातृभाषा दिवस पर केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर की ओर से आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता प्रीतम भरतवाण ने कहा कि गढ़वाली भाषा बड़ी समृद्ध है। इसमें अथाह साहित्य रचा गया है। यहां के लोकगीत, लोकगाथाएं, लोक कथाएं न केवल लोगों का मनोरंजन करती हैं। बल्कि इनमें असीम ज्ञान भी समाहित है। उन्होंने कहा कि मातृभाषा में हमारी अभिव्यक्ति सहज और प्रभावी होती है। विशिष्ट वक्ता प्रसिद्ध हास्य कवि मुरली दीवान ने गढ़वाली भाषा को व्यवहार में लाने के लिए प्रोत्साहित करते हुए एक कविता प्रस्तुत की। गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों का अंग्रेजी में अनुवाद कर चुके दीपक बिजल्वाण ने कहा कि अनुवाद की विधा भाषा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अनुवाद से भाषा का संरक्षण और प्रचार-प्रसार होता है। छात्र दिगंबर रतूड़ी ने पलायन की समस्या पर गढ़वाली कविता और छात्रा श्रुति शर्मा ने हिमाचली लोकगीत सुनाया। निदेशक बनमाली बिश्वाल की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में डा. शैलेंद्र प्रसाद उनियाल, डा. दिनेश चंद्र पांडेय, डा. अरविंद सिंह गौर, डॉ. अवधेश बिजल्वाण, डॉ. वीरेंद्र बर्त्वाल, पंकज कोटियाल, डॉ. सचिदानंद स्नेही, डॉ. कृपाशंकर शर्मा, डॉ. अनिल कुमार, डॉ. श्रीओम शर्मा, डॉ. सुरेश शर्मा, डॉ. कुसुम लता व नवीन डोबरियाल व विनोद सिंह ने भी विचार रखे।
मातृभाषा के संरक्षण पर दिया जोर
श्रीनगर। अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर आखर समिति की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने मातृभाषा को आगे बढ़ाने एवं इसके संरक्षण पर जोर दिया। कहा हमारी मातृभाषा ही हमारी पहचान है।
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रविवार को कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार डा. विष्णुदत्त कुकरेती ने मातृभाषा के पक्ष में गढ़वाली भाषा को बढ़ावा दिए जाने पर जोर दिया। कहा अपनी मातृ भाषा को व्यवहार में लाने से ही मातृभाषा बचेगी। आखर समिति के अध्यक्ष संदीप रावत ने कहा कि समिति उत्तराखंड की मातृ भाषाओं के पक्ष में पिछले एक महीने से सोशल मीडिया पर अभियान चला रही रही है। अभियान की संकल्पना एवं विचार आखर के सक्रिय सदस्य गीतेश नेगी की है। डा. अरुण कुकशाल ने कहा कि मातृ भाषा को बचाने की शुरूआत अपने घर से करनी होगी। इस मौके पर साईनी कृष्ण उनियाल, अंशी कमल व कंचन पंवार ने कविता पाठ भी किया। कार्यक्रम में समाज सेवी अनिल स्वामी, शिक्षक संघ ं के पूर्व मंडलीय मंत्री शिव सिंह नेगी, डा. सुभाष पांडेय, प्रभाकर बाबुलकर, आरती पुंडीर व संचालन शिक्षिका बबीता थपलियाल , देवी प्रसाद खंडूड़ी, प्रमोद उनियाल, विजय मेवाड़, अरूणेश मैठाणी, कमलेश बडोनी, विभोर बहुगुणा, संध्या नौटियाल, श्वेता पंवार, रेखा चमोली, अनीता काला, राधा मैंदोली आदि मौजूद थे।
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