राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस अस्पताल को अब गंभीर मरीजों के लिए खोलने की तैयारी की जा रही है। बेस अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया गया है। इस कारण यहां सिर्फ कोविड मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है।
गढ़वाल व कुमाऊं के पांच जनपदों की करीब 20 लाख की आबादी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर पर निर्भर है। यहां कैंसर समेत अन्य गंभीर रोगों के इलाज की सुविधा है। अकसर प्रसव या ऑपरेशन संबंधी गंभीर मामले अन्य जिलों से मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिए जाते हैं। कॉलेज में बड़ी संख्या में विशेषज्ञ डॉक्टर और जूनियर डॉक्टर हैं लेकिन पिछले माह कोविड अस्पताल का हवाला देते हुए मेडिकल कॉलेज/बेस अस्पताल में ओपीडी और आईपीडी बंद कर दी गई। ऐसे में जनता पूरी तरह उप जिला अस्पताल की सीमित सुविधा पर निर्भर हो गई है। उप जिला अस्पताल में वर्तमान में लगभग 45 बेड हैं जो इतनी अधिक जनसंख्या के लिए नाकाफी हैं। अब मरीजों की परेशानियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने कोविड अस्पताल बनाए गए बेस अस्पताल को अन्य मरीजों के लिए भी खोलने का निर्णय लिया है। हालंाकि प्रशासन अभी सिर्फ गंभीर रोगियों के लिए ही बेस अस्पताल को खोले जाने की बात कह रहा है।
मेडिकल कॉलेज बंद होने से हो रहीं ये समस्याएं
सीटी स्कैन बंद।
गंभीर रोगियों के ऑपरेशन बंद।
आईसीयू की सुविधा बंद।
वार्डों में बेड की कमी।
विशेषज्ञ डॉक्टर एवं स्टाफ की कमी।
पैथोलॉजी लैब में सीमित टेस्ट।
नाक-कान-गला रोग संबंधी परीक्षण बंद।
ब्लड बैंक सुविधा का अभाव।
जिला अस्पतालों से मरीज आ रहे उप जिला अस्पताल
मेडिकल कॉलेज के बंद होने से विभिन्न जिला अस्पतालों से मरीज रेफर होकर उप जिला अस्पताल लाए जा रहे हैं। यदि उप जिला अस्पताल के प्रसूति रोग विभाग की बात करें तो मई में यहां 187 सामान्य और 118 सीजेरियन प्रसव हुए हैं जबकि सामान्यता उप जिला अस्पताल में 20 से 30 प्रसव कराए जाते हैं। इनमें सीजेरियन की संख्या ना के बराबर होती है।
फिलहाल गंभीर रोगियों के उपचार व सर्जरी के लिए बेस अस्पताल खोलने की योजना चल रही है। जो-जो वार्ड खुल सकते हैं, उनको धीरे-धीरे खोला जाएगा ताकि बेड की समस्या आड़े नहीं आए।
-डॉ. विजय जोगदंडे, डीएम पौड़ी