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Pauri News: मां रसल्वांण दीबा भगवती का वार्षिक पूजन संपन्न

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पौड़ी। जनपद पौड़ी के दूरस्थ क्षेत्र विकासखंड पोखड़ा की प्रसिद्ध अधिष्ठात्री मां रसल्वांण दीबा भगवती का दो दिवसीय वार्षिक पूजन विशाल भंडारे के साथ संपन्न हो गया। विकासखंड के 25 से 30 गांवों की कुलदेवी मां दीबा के वार्षिक पूजन में श्रद्धालुओं ने देश व प्रदेशवासियों की कुशलक्षेम की प्रार्थना की।
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ल्वींठा, श्रीकोट, चरगाड़, चोपड़ा, गवाणी, किलवास, किमगड़ी, सलाण और पालीधार आदि गांवों की ओर से मां के वार्षिक पूजन को लेकर धूमधाम के साथ तैयारियां की गईं। ढोल दमांऊ और बैंडबाजे के साथ ल्वींठा से माता की डोली और रथयात्रा झलपाड़ी पहुंची। जहां से माता की डोली मंदिर के लिए रवाना हुई। इस दौरान ग्रामीणों पर माता की पश्वा अवतरित हुई। पश्वाओं के साथ पूरा मंदिर परिसर माता के जयकारों से गूंज उठा।

मां रसल्वांण दीबा समिति के अध्यक्ष जगत सिंह रावत, रणवीर सिंह भंडारी व जितेंद्र नेगी ने बताया कि दो दिवसीय वार्षिक पूजन में रात्रि जागरण के बाद विधि-विधान से पूजा-अर्चना हुई। विशाल भंडारे के साथ ही माता के वार्षिक पूजन का समापन हो गया।
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क्षेत्र के विकास की उठाई मांग



क्षेत्रवासी जितेंद्र नेगी ने बताया कि झलपाड़ी से मंदिर तक करीब सात किमी की पैदल चढ़ाई है। मंदिर तक जाने के लिए न तो सड़क सुविधा है और ना ही पैदल मार्ग हैं। पूर्व में सरकार से ट्राॅली लगवाने की मांग की गई थी। जिसको लेकर सर्वे भी हुआ, लेकिन अब मामला ठंडे बस्ते में है।

सूर्योदय का विहंगम दृश्य दिखाई देता है दीबा के डांडा से

समुद्र तल से करीब 2670 मीटर (8760 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है दीबा का डांडा। पोखड़ा और बीरोंखाल की सीमा पर स्थित है मां रसल्वांण दीबा भगवती का मंदिर। पौड़ी जनपद का एकमात्र स्थान है, जहां से सूर्योदय का विहंगम नजारा दिखाई देता है। उत्तर-पश्चिमी गढ़वाल में स्थित दीबा रेंज से यमुनोत्री शिखर के साथ ही हिमालय की त्रिशूल पर्वतमाला का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। घने आरक्षित वन क्षेत्र में स्थित होने के चलते यहां बांज, बुरांश, देवदार आदि पेड़ों की प्रजातियां पाई जाती हैं। जंगल में विभिन्न प्रकार की जड़ी-बूटियां और बेशकीमती वनस्पितयाें के साथ ही विभिन्न प्रकार के जंगली जानवर, कई पक्षियों और स्तनधारी प्रजातियां भी सामान्य रूप से देखी जा सकती हैं।
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