उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मोर्चा ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में दो दिवसीय धरना शुरू कर दिया। इसके साथ ही मुख्यमंत्री हरीश रावत से विशेष सत्र में उनकी मांगों का विधेयक पारित करने की मांग की।
सोमवार को उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी मोर्चा के सदस्य तहसील में एकत्र हुए और उन्होंने अपनी आठ सूत्री मांगों के लिए धरना शुरू कर दिया।
इस अवसर पर आयोजित सभा में वक्ताओं ने राजीनतिक दलों पर प्रदेश का विकास नहीं करने का आरोप लगाया। कहा कि जिन सपनों को लेकर प्रदेश की जनता ने सड़कों पर भूखे प्यासे उतरकर आंदोलन किया था, वह पूरा नहीं हो पाया।
उत्तराखंड का गठन तो हो गया, नेताओं को मंत्री पद भी मिल गए, लेकिन आंदोलनकारियों को उचित सम्मान नहीं मिल पाया उन्हें आज भी अपने अधिकारों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है।
उन्होंने 1994 में हुए मुजफ्फरनगर कांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए उत्तराखंड सरकार और आंदोलनकारियों की तरफ से पैरवी करने, स्थायी और अस्थायी जेल की अवधि का एक दिन का मानक बनाया जाने आदि मांगें रखीं।
इस अवसर पर मोर्चा के महासचिव महेंद्र सिह रावत, राकेश चंद्र लखेड़ा, कमला शाह, समीम, लक्ष्मी देवी, सुरेशी देवी, ध्यान सिंह रावत, तेजेंद्र सिंह, दिनेश जुयाल, गंभीर सिंह नेगी, पितृशरण जोशी, कमल चमोली, अनिल अग्रवाल आदि मौजूद थे।