फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहली बार बिना श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा का आज होगा समापन

विज्ञापन
पवित्र अमरनाथ गुफा में श्रावण पूर्णिमा के अवसर पर सोमवार को पूजन करते महंत दीपेंद्र गिरि व अन्य स - फोटो : SHRINAGAR
विज्ञापन
श्रीनगर। इस बार यात्रा के बगैर ही अमरनाथ यात्रा का मंगलवार को विधिवत समापन हो जाएगा। इस दौरान पहलगाम में लिद्दर नदी किनारे पूजन-विसर्जन किया जाएगा। इससे पहले सावन पूर्णिमा पर सोमवार को पवित्र छड़ी को हेलिकॉप्टर से पवित्र गुफा में लाकर पूजा-अर्चना की गई। दशनामी अखाड़ा के महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि यह तीसरा मौका है, जब हेलिकॉप्टर से छड़ी लाई गई है। इससे पहले पिछले साल पांच अगस्त को अनुच्छेद 370 हटाए जाने से पहले यात्रा स्थगित कर दी गई थी, जिसके बाद छड़ी हेलिकॉप्टर से ले जाई गई थी। 1996 में भी हवाई मार्ग से ही छड़ी गई थी।
विज्ञापन

दशनामी अखाड़े के महंत और पवित्र छड़ी मुबारक के संरक्षक महंत दीपेन्द्र गिरि श्रीनगर के दशनामी अखाड़े में स्थित अमरेश्वर मंदिर से चंद साधु-संतों के साथ सुबह करीब 6 बजे श्रीनगर के राजभवन स्थित नेहरू हेलीपैड पहुंचे, जहां से उन्हें हेलिकॉप्टर से पवित्र अमरनाथ गुफा के लिए ले जाया गया। महंत और साधु-संतों की टोली सुबह करीब 8 बजे पवित्र गुफा पहुंची। इसके बाद मुहूर्त के अनुसार सुबह 10 बजे स्वामी अमरनाथ जी और मां पार्वती की छड़ी मुबारक की पारंपरिक विधि अनुसार पूजा-अर्चना की गई।
कोरोना संकट से पारंपरिक रास्ते से नहीं जा सकी छड़ी
महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि कोविड-19 के चलते गिने चुने साधु-संत ही पवित्र छड़ी के साथ इस बार जा सके, नहीं तो हर वर्ष अच्छी-खासी संख्या में साधु-संतों के साथ छड़ी मुबारक को अमरेश्वर मंदिर दशनामी अखाड़ा श्रीनगर से नाग पंचमी पर पूजन कर रवाना किया जाता था। रास्ते में पांपोर, बिजबिहाड़ा, गौतम नाग, अनंतनाग, मट्टन, अशमुकाम और पहलगाम में रात्रि पड़ाव के बाद फिर छड़ी मुबारक पवित्र गुफा के लिए रवाना होती थी। इस दौरान चंदनबाड़ी, शेषनाग, पंजतरणी में छड़ी का रात्रि पड़ाव होता था। इसके बाद पवित्र गुफा में छड़ी मुबारक का पूजन कर पहलगाम में विसर्जन के साथ वार्षिक यात्रा का समापन होता था।
विज्ञापन

पूजा में कोरोना के खात्मे के लिए अरदास
उन्होंने बताया कि पूजा-अर्चना में कोरोना महामारी के खात्मे की अरदास की गई, ताकि सभी लोग फिर से सामान्य जीवन जी सकें। महंत ने बताया कि छड़ी मुबारक को लेकर वह पहलगाम पहुंच चुके हैं। मंगलवार सुबह लिद्दर नदी के किनारे पूजन और विसर्जन समारोह के साथ वार्षिक अमरनाथ यात्रा का समापन होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें