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लिद्दर नदी किनारे पूजा अर्चना के साथ अमरनाथ यात्रा का समापन

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अनंतनाग। पहलगाम में लिद्दर नदी किनारे पूजा-अर्चना के साथ मंगलवार को पवित्र अमरनाथ यात्रा का समापन हो गया। महंत दीपेंद्र गिरि ने बताया कि वार्षिक यात्रा को लेकर सभी परंपराओं तथा पूजन प्रक्रिया को संपन्न कराया गया। कोरोना संकट से मुक्ति तथा सुख-समृद्धि व शांति की कामना की गई। इससे पहले श्रावण पूर्णिमा पर सोमवार को पवित्र गुफा में छड़ी मुबारक की पूजा-अर्चना की गई थी। लगातार दूसरे साल हेलिकॉप्टर से इस बार छड़ी ले जाकर पूजा की गई थी। इससे पहले 1996 में भी हवाई मार्ग से छड़ी गई थी।
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हरियाली अमावस्या पर 20 जुलाई को छड़ी मुबारक यात्रा शंकराचार्य मंदिर से शुरू हुई थी। 21 जुलाई को हरि पर्वत पर शारिका भवानी मंदिर में छड़ी रखी गई। नागपंचमी पर 25 अगस्त को अमरेश्वर मंदिर में छड़ी की पूजा की गई। कोरोना संकट की वजह से यात्रा के समापन पर इस बार परंपरागत कड़ी पकौड़ा भंडारा आयोजित नहीं किया गया। केवल हलवा प्रसाद के रूप में वितरित किया गया। 1996 में भी हवाई मार्ग से ही छड़ी गई थी।
ज्ञात हो कि अमरेश्वर मंदिर दशनामी अखाड़ा श्रीनगर से नाग पंचमी पर पूजन कर छड़ी मुबारक को रवाना किया जाता था। रास्ते में पांपोर, बिजबिहाड़ा, गौतम नाग, अनंतनाग, मट्टन, अशमुकाम और पहलगाम में रात्रि पड़ाव के बाद फिर छड़ी मुबारक पवित्र गुफा के लिए रवाना होती थी। इस दौरान चंदनबाड़ी, शेषनाग, पंजतरणी में छड़ी का रात्रि पड़ाव होता था। लेकिन इस बार कोरोना संकट के चलते ऐसा नहीं हो सका।
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