घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस की ओर से की जा रही निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। रविवार देर रात श्रीनगर सहित ऊपरी क्षेत्रों में हुई बारिश के कारण सोमवार को अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ गया और अलकेश्वर घाट जलमग्न हो गया। हालांकि जलस्तर अभी चेतावनी और खतरे के निशान से नीचे बह है।
सिंचाई विभाग के अनुसार सोमवार सुबह अलकनंदा नदी का जलस्तर 533.60 मीटर रिकॉर्ड किया गया जो दोपहर तक बढ़कर 533.70 मीटर पहुंच गया। नदी का जलस्तर फिलहाल चेतावनी स्तर 535 मीटर और खतरे के निशान 536 मीटर से नीचे है। विभाग लगातार नदी की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। सिंचाई विभाग की अपर सहायक अभियंता अंकिता राणा ने बताया कि श्रीनगर क्षेत्र में सोमवार को 31 मिमी बारिश दर्ज की गई। लगातार बारिश के कारण सुबह अलकेश्वर घाट का निचला हिस्सा जलमग्न हो गया। हालांकि दोपहर बाद बारिश थमने पर स्थिति सामान्य बनी रही। वहीं कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कुलदीप सिंह ने बताया कि घाटों पर सुरक्षा के लिए पुलिस टीम की ओर से नियमित निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से बरसात के दौरान नदी किनारे अनावश्यक रूप से नहीं जाने की अपील की।
बारिश में सड़कों पर फैल रही गंदगी
श्रीनगर। नगर क्षेत्र में चोक नालियां लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनी हुई हैं। बरसात होते ही नालियों का पानी सड़कों पर फैल जाता है जिससे जगह-जगह गंदगी पसर जा रही है। सबसे अधिक दिक्कत नर्सरी रोड के निचले हिस्से में है। जहां प्लास्टिक कचरा, सीवर और कीचड़ सड़क पर फैलने से राहगीरों और वाहन चालकों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। सोमवार को भी बारिश से नर्सरी रोड पर रेलवे पुल के समीप यह समस्या बनी रही। अल्केश्वर महादेव मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भारी दिक्कतें हुईं। बाद में नगर निगम के पर्यावरण मित्रों ने यहां पहुंचकर गंदगी साफ की। लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभाग से नालियों की सफाई कराने तथा जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की। वहीं नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त रविराज बंगारी ने बताया कि निगम की ओर से इस समस्या का समाधान किया जा रहा है। उन्होंने लोगों से प्लॉस्टिक व कूड़ कचरा नालियों में न फेंकने की अपील की। संवाद
मंजाकोट-बंदासा मार्ग पर बरसात में सफर हुआ मुश्किल
श्रीनगर। विकासखंड कीर्तिनगर का मंजाकोट-बंदासा मार्ग की बदहाल स्थिति से ग्रामीणों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। बरसात के दौरान सड़क पर बने गहरे गड्ढों और उभरे नुकीले पत्थरों के कारण वाहन चलाना तो दूर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है। आए दिन लोग फिसलकर चोटिल हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पीएमजीएसवाई के तहत बजट स्वीकृत होने पर भी सड़क पर डामरीकरण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है।
बंदासा गांव के पूर्व प्रधान रघुवीर सिंह रावत व धन सिंह ने बताया कि पिछले करीब दस वर्षों से ग्रामीण जर्जर सड़क पर जान जोखिम में डालकर आवागमन करने के लिए मजबूर हैं। बारिश के कारण सड़क कई स्थानों पर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है। चार किलोमीटर का सफर तय करने में करीब एक घंटे से अधिक समय लग रहा है। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग से सड़क की तत्काल मरम्मत कराने और डामरीकरण की मांग की। वहीं पीएमजीएसवाई खंड लोनिवि कीर्तिनगर के अधिशासी अभियंता शिवम रावत का कहना है कि चार किमी सड़क के सुधारीकरण व डामरीकरण आदि कार्यों के लिए कुल 853.07 लाख की धनराशि स्वीकृत है। बरसात के बाद निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा। संवाद