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वाल्मीकि नगर का बोर्ड लगाने पर बवाल

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कोटद्वार। आमपड़ाव स्थित इंदिरा नगर में वाल्मीकि नगर का बोर्ड लगाने को लेकर सोमवार को जमकर बवाल हुआ। पक्ष और विरोध में दोनों तरफ के लोग आमने-सामने आ गए। नौबत हाथापाई तक जा पहुंची, लेकिन पुलिस ने किसी तरह से दोनों पक्षों को शांत कराया। प्रशासन ने फिलहाल बोर्ड को ढक दिया है। पालिका बोर्ड की बैठक के बाद ही इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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महर्षि वाल्मीकि जयंती के अवसर पर वाल्मीकि समाज के लोगों ने इंदिरानगर में एक बड़ा बोर्ड लगाकर उसमें वाल्मीकि नगर लिख दिया था। समाज के लोगों का कहना है कि यहां पर आजादी के बाद शासन ने वाल्मीकि बस्ती बसाई थी। लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर इंदिरानगर कर दिया गया। लिहाजा इस बस्ती का नाम पूर्व की भांति वाल्मीकि नगर रखा जाना चाहिए।
सोमवार को इसके विरोध में पूर्व पालिकाध्यक्ष शशि नैनवाल के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने तहसील में प्रदर्शन किया। उन्होंने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर बोर्ड को गैरकानूनी करार दिया। जिसकी भनक लगते ही वाल्मीकि समाज के लोग भी एकत्र हो गए। उन्होंने वाल्मीकि नगर नाम रखने के समर्थन में नगर पालिका में प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध करने वाले भी नगर पालिका पहुंच गए। नगर पालिका में दोनों पक्षों से जुडे़ लोग आमने-सामने आ गए। दोनों पक्षों के लोग एक दूसरे के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। माहौल बिगड़ता देख एसडीएम जीआर बिनवाल ने नगर पालिका में तुरंत बैठक बुलाई। जिसमें नगर पालिका, पुलिस और तहसील प्रशासन के अलावा वाल्मीकि समाज के लोगों को बुलाया गया। बैठक में प्रशासन ने कहा कि बिना पालिका की अनुमति के बोर्ड लगाना गलत है। मामले को आपसी सहमति से सुलझाने के लिए उसी वक्त मौका मुआयना करने का निर्णय लिया। जैसे ही प्रशासन मौके पर पहुंचा, पूर्व पालिका अध्यक्ष शशि नैनवाल भी वहां पर आ गई। उनका कहना था कि यह क्षेत्र वाल्मीकि बाहुल्य नहीं है, यहां पर दूसरे लोग भी अधिक संख्या में रहते हैं। इसी बीच शशी नैनवाल के बेटे संदीप नैनवाल भी वहां पहुंच गए। वाल्मीकि समाज के कुछ युवकों और संदीप के बीच कहासुनी होने लगी। नौबत मारपीट की आ गई। लेकिन पुलिस ने किसी तरह दोनों पक्षों को अलग कर मामला शांत करा दिया। कोतवाल प्रमोद शाह ने बताया कि हालात को देखते हुए क्षेत्र में पुलिस तैनात की गई है।
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पालिका बोर्ड के बाद होगा फैसला
दोपहर पालिका सभागार में वाल्मीकि समाज के लोगों के साथ बैठक की गई। बैठक में तय किया गया कि पालिका बोर्ड की बैठक में इसका प्रस्ताव लाया जाएगा। प्रस्ताव पारित होने तक इंदिरानगर में लगाए गए वाल्मीकि बोर्ड को ढक दिया जाएगा। जिसपर वाल्मीकि समाज का नेतृत्व कर रहे दिलेंद्र गौडियाल ने सहमति व्यक्त की। इसके लिए तीन नवंबर को पालिका बोर्ड की बैठक बुलाई जाएगी।
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