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कैसे हो उपचार जब जांच की सुविधा नहीं

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श्रीनगर। गढ़वाल क्षेत्र के एकमात्र टर्शियरी केयर सेंटर बेस अस्पताल में मेडिकल कालेज की स्थापना के बाद भले ही उपकरणों से लैस लैब उपलब्ध हो, लेकिन आज भी यहां आ रहे रोगियों को अधिकांश मामलों में दिल्ली या अन्य प्रदेशों के परीक्षणों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। बात स्क्रब टायफस की हो या डेंगू की। कई बार बायोप्सी या पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) के लिए भी बेस अस्पताल की लैब, बाहरी प्रदेशों के लिए सैंपल भेजने को विवश है।
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बेस अस्पताल में माइक्रोबायलॉजी, बायोकैमिस्ट्री तथा पैथोलॉजी में करोड़ों की लागत के उपकरण उपलब्ध हैं, लेकिन फिर भी सैकड़ों रोगियों को हर रोज बाहर की निजी लैबों से परीक्षण कराने पड़ रहे हैं। इसके पीछे कभी सरकारी लैब के प्रति रोगी की अविश्सनीयता बताई जा रही है, तो अधिकांश बार परीक्षण के लिए जरूरी कैमिकल की अनुपलब्धता। बीते दो वर्षों में तो उपकरणों की खराबी पर वार्षिक रख रखाव का करार न हो पाना बताया गया।

32 स्क्रब टायफस रोगी पॉजीटिव
केस एक-
- बेस अस्पताल में 32 स्क्रब टायफस रोगी पॉजीटिव पाए गए हैं। अभी विभाग के पास एक दर्जन से अधिक सैंपल परीक्षण के लिए उपलब्ध हैं, लेकिन किट नहीं। ऐसे में जब तक किट नहीं मिल जाती, परीक्षण संभव नहीं हैं।
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लाखों की मशीन पर जेनरेटर न होने से ठप
- विभिन्न बैक्टीरियल रोगों में कंफर्मेशन के लिए पीसीआर (पॉलीमरेज चेन रिएक्शन) परीक्षण किया जाता है। लाखों की लागत की मशीन विभाग के पास उपलब्ध है, लेकिन बैटरी बैकअप या जेनरेटर की व्यवस्था न हो पाने के कारण आज तक इस मशीन का उपयोग नहीं किया गया। जरूरत पड़ने पर कालेज तथा रोगी इस परीक्षण के लिए दिल्ली या अन्य प्रदेशों पर निर्भर रहता है।

दंगों में फंस गए जांच के सैंपल
- नगर क्षेत्र के निजी पैथोलॉजी लैब भी बायोप्सी व अन्य परीक्षणों के लिए सैंपल तो ले लेते हैं, लेकिन थायरॉयड, बायोप्सी, डेंगू, चिकनगुनिया के अलावा अन्य दर्जनों परीक्षणों को वे भी बाहरी प्रदेशों की लैबों से करा रहे हैं। बेस अस्पताल के बाहर स्थित लाल पैथ की ओर से दिल्ली भेजे जा रहे सैंपल के कुरियर तो मुजफ्फरनगर में हुए दंगों में फंसे रह गए, जिससे आए दिन रोगी लैब के चक्कर लगाकर थक रहे हैं।

कोट
- पीसीआर परीक्षण के लिए मौजूद उपकरण को बैटरी बैकअप के बिना चलाया नहीं जा सकता। यदि एक सेकेंड के लिए भी विद्युत आपूर्ति बाधित होती है, तो परीक्षण के लिए मशीन में लगाए गए हजारों रुपयों के किट बेकार हो जाएंगे तथा परीक्षण की रिपोर्ट भी नहीं मिल पाएगी। उम्मीद है कि इस माह के अंत तक बैटरी बैक अप के लिए कालेज प्रशासन व्यवस्था कर दे।
प्रो. नीलम शर्मा, विभागाध्यक्ष माइक्रोबायलॉजी

- मेडिकल कालेज से जो भी जरूरत के किट मांगे जा रहे हैं, उन्हें उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मलेरिया को लेकर भी स्वास्थ्य विभाग चिंतित है। इसलिए डेंगू के एलाइजा टेस्ट की किट भी बृहस्पतिवार सुबह तक बेस अस्पताल पहुंचा दी जाएगी।
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सुभाष जोशी, जिला मलेरिया अधिकारी
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