श्रीनगर। भारत-चीन के समकालिक संबंध: अवसर, बाधाएं और दृष्टिकोण विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कार्यशाला सोमवार से यहां शुरू हो गई है। इस मौके पर बतौर मुख्य वक्ता भारत सरकार के पूर्व विदेश सचिव प्रो. मुचकंद दुबे ने चीन और भारत के रिश्तों को फिर से जागृत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों को तहत संबंध स्थापित करने चाहिए। उन्होंने चीन के स्तर पर भारत की कई वस्तुओं के आयात पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाए जाने की जरूरत बताई।
गढ़वाल केंद्रीय विवि के राजनीति विज्ञान विभाग की ओर से यह कार्यशाला आयोजित की गई है। इस मौके पर सेंटर फॉर कॅनटेमपररि स्टडीज काठमांडू नेपाल के एक्जीक्यूटिव चेयरमेन प्रो.लोकराज बराल ने भारत-चीन संबंध और नेपाल की भूमिका पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि चीन हमेशा नेपाल को भारत से सही संबंध बनाए रखने की सलाह देता है। कहा कि नेपाल-भारत के साथ जितने नजदीकी संबंध हैं, वह चीन-नेपाल के बीच संभव नहीं है। सेंटर फॉर स्ट्रेटजिक स्टडीज बीजिंग के एक्जीक्यूटिव डिप्टी सेक्रेटरी प्रो. माजिलाई ने कहा कि भारतीय संगीत, संस्कृति, योग, फिल्म चीन में बहुत लोकप्रिय है।
जेएनयू विवि के स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज के प्रो. स्वर्ण सिंह ने चीन और भारत की सभ्यताओं को प्राचीन बताते हुए कहा कि मधुर संबंध होने पर दोनों देश अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं। उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए गढ़वाल विवि के कुलपति प्रो. एसके सिंह ने कहा कि भारत-चीन के संबंधों में सामरिक विषय के अलावा अन्य कई पहलु भी हैं। इन पर भी ध्यान देना जरूरी है। कार्यशाला संयोजक प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन प्रो. हिमांशु बौड़ाई ने किया। प्रो. जेपी पचौरी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यशाला में चीन, नेपाल, ढाका व भारत के प्रतिभागी शामिल हैं।