एनजीटी में दायर एक मामले की जांच में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय देहरादून की टीम मुख्यालय पहुंची। शुक्रवार को टीम ने गडोली व मांडाखाल क्षेत्र के संरक्षित वन क्षेत्र का मुआयना किया। इस दौरान गडोली के ग्रामीणों ने भी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय टीम के समक्ष अपना पक्ष रखने के साथ ही आक्रोश भी व्यक्त किया। मांडाखाल व गडोली के वन क्षेत्र में निर्माण, खनन व वन अधिनियम के खिलाफ चल रही अन्य गतिविधियों को लेकर वर्ष 2016 में स्थानीय निवासी सुबीर मारियो चौफीन ने एनजीटी में मामला दायर किया। एनजीटी ने इस मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा। इसे लेकर शुक्रवार को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय देहरादून इकाई की टीम मुख्यालय पहुंची। टीम ने गढ़वाल वन प्रभाग के अधिकारियों के साथ मांडाखाल व गडोली क्षेत्र के संरक्षित वन क्षेत्र का मुआयना किया। टीम के सामने गडोली व मांडाखाल के ग्रामीणों ने आक्रोश जाहिर किया। उन्होंने क्षेत्र को संरक्षित वन घोषित करने की प्रक्रिया का भी विरोध किया। ग्रामीण रघुवर दत्त भट्ट, चंद्र प्रकाश, पंकज कुमार, ओम प्रकाश, राजेंद्र सिंह, अनीता देवी व पारेश्वरी देवी विरोध में शामिल रही। पर्यावरण मंत्रालय की टीम ने ग्रामीणों को विश्वास दिया कि इस मामले की पूरी पड़ताल की जाएगी।
गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ रमेश चंद्र ने बताया कि एनजीटी के लिए रिपोर्ट तैयार की जा रही है। मामले की जांच वन एवं पर्यावरण मंत्रालय देहरादून द्वारा की जा रही है। जांच 30 जुलाई तक चलेगी।