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पांडव नृत्य महोत्सव में दिखी गढ़वाल की लोक संस्कृति

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पौड़ी/बैजरो। राठ क्षेत्र के रिकसाल गांव में आयोजित पांडव नृत्य महोत्सव में गढ़वाल की लोक संस्कृति की छठा देखने को मिली। चमोली, अल्मोड़ा और पौड़ी गढ़वाल से आए श्रद्धालुओं ने देव दर्शन कर देवताओं से आशीर्वाद लिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने इस क्षेत्र में निवास किया था। तब से यहां के निवासी पांडवों को अपने ईष्टदेव के रूप में पूजते हैं। पांडवों में मुख्य रूप से भीमसेन की पूजा की जाती है।
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पांडव नृत्य महोत्सव की शुरुआत गणेश पूजन से हुई। पूजन में पांडवों सहित भैरव, भराड़ी, बिनसर, लाटू, क्षेत्रपाल व देवी भगवती सहित अनेक देवी देवताओं के डंगरियों ने भाग लिया। इसके बाद पांडव मंदिर के पुजारी ढौंडियाल परिवारों सहित पूरे गांव के ग्रामीणों ने विधिवत पूजा अर्चना की। इसके बाद बाजगियों द्वारा ढोल दमाऊं बजाकर देव आह्वान किया और पांडव नृत्य शुरू हुआ। सबसे पहले पांडव मंदिर, भैरव देवता के मंदिर गए। उसके बाद पांडवों में मुख्य रूप से भीमसेन, अर्जुन एवं नकुल नेे नृत्य कर श्रद्धालुओं को अपने दर्शन दिए। भीमसेन ने 11 किलो की गदा को अपनी तीन उंगलियों से उठाया।
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