पौड़ी। गढ़वाल व कुमाऊं के प्रसिद्ध विंदेश्वर मंदिर के जीर्णोद्घार का कार्य वन विभाग ने वन अधिनियम का हवाला देते हुए रोक दिया है। गुस्साए ग्रामीण इसके लिए वन विभाग को दोषी ठहरा रहे हैं। ग्रामीणों ने इस बारे में प्रदेश के वन एवं पर्यावरण मंत्री को ज्ञापन भी भेजा है। चेतावनी दी है कि निर्माण शीघ्र शुरू नहीं हुआ तो वे आंदोलन करेंगे।
मुख्यालय पौड़ी से 123, चमोली से 12 व रामनगर से 15 किमी के सड़क व पीठसैंण से 12 किमी पैदल दूरी पर स्थित विंदेश्वर महादेव मंदिर पुरातत्व विभाग की गणना के अनुसार 12वीं शताब्दी में निर्मित हुआ है। वर्ष 2015 में बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने मंदिर अधिग्रहित किया। घने जंगल के बीच स्थित मंदिर की दीवारें दरकने से मंदिर झुकने लगा था। इस पर समिति ने मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य के लिए 3.50 करोड़ रुपये स्वीकृत किए। अप्रैल 2017 से मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य शुरू हुआ। क्षेत्र पंचायत सदस्य मंगल सिंह व पूर्व जिला पंचायत सदस्य विक्रम ने बताया कि बीते बृहस्पतिवार को मंदिर के पत्थरों पर नंबरिंग के बाद मंदिर ध्वस्त कर दिया गया। मंदिर ध्वस्त होते ही वन विभाग के वन क्षेत्राधिकारी थलीसैंण अनिल रावत मौके पर पहुंचे और निर्माण रुकवा दिया। इसके बाद आसपास के गांव मासौ, दैडा, सुंदरगांव, मैखोली, सज्याणा, कांडाई, बूंगीधार, रिक्साल समेत अन्य गांवों ने इसका विरोध किया। रविवार को ग्रामीण राकेश ममगाईं, श्याम सिंह, हर्षलाल, इंद्र सिंह, अनुसूया प्रसाद, सुशील धस्माना, श्याम सिंह, श्याम चरण, प्रह्लाद सिंह आदि ने वन मंत्री को इस बारे में ज्ञापन भेजा है। चेतावनी दी है कि मंदिर का जीर्णोद्धार शीघ्र शुरू नहीं हुआ तो ग्रामीण आंदोलन को विवश होंगे।
कोट
विंदेश्वर महादेव मंदिर भले ही प्राचीन है, लेकिन वन संरक्षण अधिनियम के उल्लंघन की अनुमति नहीं दी जा सकती। इसकी जांच की जा रही है।
-लक्ष्मण सिंह, डीएफओ गढ़वाल।
कोट
मंदिर का जीर्णोद्घार कार्य रोक दिया गया है। मंदिर रिजर्व फारेस्ट में है और रिजर्व फारेस्ट में निर्माण नहीं हो सकता। बहरहाल ग्रामीणों से मंदिर की पत्रावलियां मांगी गई है। पत्रावलियों की जांच के बाद मामला डीएफओ पौड़ी का भेजा जाएगा।
अनिल रावत, वन क्षेत्राधिकारी, थलीसैंण, पौड़ी।
कोट
बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति मंदिर का जीर्णोद्धार कर रही है। वन विभाग ने निर्माण रोका है, जो कतई उचित नहीं। प्रभागीय वनाधिकारी को निर्माण रोकने से पहले यह भी जान लेना चाहिए कि 12वीं शताब्दी के मंदिर राष्ट्र ही नहीं, बल्कि विश्व की धरोहर है। इसका निर्माण रोकना भी गैर कानूनी होगा।
-गणेश गोदियाल, अध्यक्ष बदरी-केदार मंदिर समिति।