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भाषा समृद्धि में ही गढ़वाली होने का गौरव

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पौड़ी। गढ़वाली बोली-भाषा और संस्कृति के संरक्षण के लिहाज से जीआईसी पोखरीखेत में 350 छात्र-छात्राओं की कार्यशाला आयोजित की गई। साहित्यकार वीरेंद्र पंवार ने विद्यार्थियों को गढ़वाली बोली-भाषा के विभिन्न पहलुओं से वाकिफ करवाया।
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साहित्य-संस्कृति और भाषा को लेकर खातस्यूं पट्टी के जीआईसी पोखरीखेत में आयोजित कार्यशाला में ग्रामीण छात्र-छात्राओं को गढ़वाली भाषा का पाठ पढ़ाया गया। गढ़कला सांस्कृतिक संस्था की ओर से आयोजित कार्यशाला में गढ़वाली साहित्यकार वीरेंद्र पंवार ने कहा कि गढ़वाली भाषा लिख-बोल कर ही हम सीख सकते हैं। संस्था के सचिव प्रेम बल्लभ पंत ने बच्चों को लोक गीतों के गायन की बारीकियां सिखाईं। हास्य प्रस्तुत कर उन्होंने स्कूली बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों को लोट-पोट किया।
विद्यालय के प्रधानाचार्य डीएस रावत, पूर्व प्रधानाचार्य प्रेम सिंह रावत, कार्यशाला निर्देशक विनोद श्रीकोटी और संस्था के अध्यक्ष त्रिभुवन उनियाल ने भी कार्यशाला में अपने व्याख्यान दिए। कार्यशाला में ग्राम प्रधान गडरिया स्नेहलता, प्रधान सिमतोली भागेश्वरी देवी, प्रधान बहेली राजेंद्र सिंह गुर्साइं, पीटीए अध्यक्ष सूबेदार मेजर रतन सिंह, प्रधानाध्यापक हिमालयन पब्लिक स्कूल विक्रम सिंह रावत ने कार्यशाला में विचार रखे।
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इनसेट
स्थापना दिवस पर गढ़वाली भाषा पर स्पर्धाएं
राज्य स्थापना दिवस पर गढ़वाली भाषा सामान्य ज्ञान स्पर्धा आयोजित की जाएगी। बाल दिवस पर 14 नवंबर को प्रसिद्ध लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी के गीतों पर नृत्य और लोक गीतों की स्पर्धा भी आयोजित की जाएगी। इस स्पर्धा में 240 प्रतिभागियों की सूची भी तैयार कर ली गई है।
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