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सामान्य वर्ग के छात्रों को नहीं मिले पाठ्य पुस्तको के पैंसे

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श्रीनगर। राजकीय विद्यालयों में अध्ययनरत कक्षा 1 से 8 तक सामान्य वर्ग के छात्रों को पाठ्य पुस्तकों की धनराशि नहीं मिल पाई है। जबकि आरक्षित वर्ग के छात्र-छात्राओं और सामान्य वर्ग की छात्राओं को धनराशि मिल गई है। ऐसी स्थिति में अब अभिभावक स्कूलों में शिक्षकों से बार-बार धनराशि के बारे में पूछ रहे हैं। ऊपरी स्तर से कोई आदेश न होने के चलते शिक्षकों के मुंह बंद हैं।
सरकार की समग्र शिक्षा योजना के तहत कक्षा 1 से 8 तक के सभी बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तकें मिलती हैं। पूर्व में शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों में पाठ्य पुस्तकों का वितरण कराया जाता था। लेकिन चालू शिक्षण सत्र से इसमें बदलाव किया गया है। अब पाठ्य पुस्तकों के लिए निर्धारित धनराशि बच्चों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जा रही है।
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लेकिन अभी तक सिर्फ एससी/एसटी वर्ग के छात्र-छात्राओं और सामान्य वर्ग की छात्राओं के बैंक खातों में निर्धारित धनराशि पहुंची हैं। जबकि सामान्य वर्ग के छात्र इससे अभी वंचित हैं। समस्या यह है कि विभागीय आदेश के बाद शिक्षकों ने छात्रों के बैंक खाते खुलवा दिए। अभिभावकों को यह कहा गया कि उनके बैंक खातों में धनराशि आ जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अब अभिभावक स्कूलों में आकर धनराशि का तकाजा कर रहे हैं। धनराशि न मिलने की वजह से शिक्षकों को भी कोई जवाब नहीं सूझ रहा है।
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जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) कुंवर ङ्क्षसह ने बताया कि सामान्य वर्ग के छात्रों को राज्य सरकार धनराशि देती है। जबकि शेष को केंद्र सरकार। केंद्र की ओर से समय पर धनराशि नहीं मिलने पर राज्य के हिस्से से धनराशि आरक्षित वर्ग के बच्चों और सामान्य वर्ग की कन्याओं को दे दी गई। इसके अलावा पूर्व में प्राथमिक स्तर में 150 और जूनियर स्तर में 250 रुपये निर्धारित था। बाद में इसको बढ़ाकर क्रमश: 250 और 400 कर दिया गया। इस वजह से सभी को धनराशि नहीं मिल पाई थी। अब केंद्र से बजट मिल गया है। जिससे सामान्य वर्ग के छात्रों के बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर की जाएगी।
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